ग्रहण 2026: तारीख, भारत में समय और सूतक काल
सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण 2026 — पूरी सूची, निरयन राशि-नक्षत्र सहित
संक्षेप में: 2026 के सभी 4 ग्रहण बीत चुके हैं। भारत से केवल चंद्र ग्रहण — 3 मार्च 2026 दिखाई दिया था।
2026 के सभी 4 ग्रहण
| तारीख | ग्रहण | राशि / नक्षत्र | चरम (IST) | भारत में दृश्य | सूतक |
|---|---|---|---|---|---|
| 17 फरवरी 2026 बीत चुका | 🌑 सूर्य ग्रहण वलयाकार ("रिंग ऑफ फायर") | कुंभ 4°37′ · धनिष्ठा | 5:42 PM IST | नहीं | नहीं |
| 3 मार्च 2026 बीत चुका | 🌕 चंद्र ग्रहण पूर्ण ("ब्लड मून") | सिंह 18°38′ · पूर्वा फाल्गुनी | 5:04 PM IST | हाँ — आंशिक | मान्य |
| 12 अगस्त 2026 बीत चुका | 🌑 सूर्य ग्रहण पूर्ण | कर्क 25°49′ · आश्लेषा | 11:16 PM IST | नहीं | नहीं |
| 28 अगस्त 2026 बीत चुका | 🌕 चंद्र ग्रहण आंशिक (93% ढका हुआ) | कुंभ 10°37′ · शतभिषा | 9:43 AM IST | नहीं | नहीं |
निरयन स्थितियाँ स्विस एफ़ेमेरिस (लाहिड़ी अयनांश) से, प्रत्येक ग्रहण के चरम क्षण पर गणित। समय वैश्विक ग्रहण-समय का IST रूपांतरण है — यह बताता है कि ग्रहण कब हो रहा है, यह नहीं कि वह भारत से दिखेगा।
सूतक काल — कब लगता है और कब नहीं
वह नियम जो अधिकतर पन्ने छोड़ देते हैं
सूतक आपके स्थान से ग्रहण के दृश्य होने पर लगता है, केवल पृथ्वी पर कहीं ग्रहण होने से नहीं। यदि ग्रहण के समय सूर्य या चंद्रमा आपके क्षितिज से नीचे हैं, तो आपके यहाँ सूतक मान्य नहीं — मंदिर खुले रहते हैं, भोजन सामान्य रूप से बनता है, कोई निषेध नहीं। इसीलिए एक ही ग्रहण लंदन में सूतक ला सकता है और दिल्ली में नहीं।
जब सूतक लगता है
- सूर्य ग्रहण: सूतक 12 घंटे पहले आरंभ।
- चंद्र ग्रहण: सूतक 9 घंटे पहले आरंभ।
- ग्रहण समाप्त होते ही सूतक समाप्त; स्नान से इसे पूर्ण माना जाता है।
- बच्चे, वृद्ध और रोगी परंपरा से उपवास के नियम से मुक्त हैं।
2026 के हर ग्रहण का ज्योतिषीय अर्थ
🌑 सूर्य ग्रहण — 17 फरवरी 2026
बीत चुकाकुंभ · धनिष्ठाकुंभ राशि, धनिष्ठा नक्षत्र में वलयाकार ग्रहण, राहु-केतु धुरी पर — प्रतिष्ठा, नेटवर्क, आय-संरचना और व्यवस्थाओं से जुड़े विषय। कुंभ शनि की राशि है, इसलिए इसका असर अचानक घटनाओं के बजाय धीमे संस्थागत बदलाव जैसा पढ़ा जाता है।
सर्वाधिक प्रभाव: कुंभ और सिंह चंद्र राशि पर। भारत: दृश्य नहीं। भारत में दृश्य नहीं — यहाँ सूतक काल मान्य नहीं था।
17 फरवरी 2026: पूरा समय, सूतक और राशि प्रभाव →🌕 चंद्र ग्रहण — 3 मार्च 2026
बीत चुकासिंह · पूर्वा फाल्गुनीपूर्ण चंद्र ग्रहण, चंद्रमा सिंह राशि, पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में — अहंकार, पहचान, संतान और रचनात्मकता। चंद्र ग्रहण वही दिखाते हैं जो भावनात्मक रूप से पहले से बन रहा था; यह ग्रहण प्रतिष्ठा और अभिमान से जुड़े अध्याय समाप्त करने को कहता है।
सर्वाधिक प्रभाव: सिंह और कुंभ चंद्र राशि पर। भारत: पूर्वी राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश) में चंद्रोदय के समय आंशिक रूप से दृश्य — 2026 का एकमात्र ग्रहण जो भारत से दिखा। भारत में सूतक मान्य था — चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण से 9 घंटे पहले आरंभ होता है।
3 मार्च 2026: पूरा समय, सूतक और राशि प्रभाव →🌑 सूर्य ग्रहण — 12 अगस्त 2026
बीत चुकाकर्क · आश्लेषा2026 का सबसे महत्वपूर्ण ग्रहण। कर्क राशि के अंतिम अंश, आश्लेषा नक्षत्र में पूर्ण सूर्य ग्रहण — और सिंह के आरंभ में स्थित केतु के इतने निकट कि इसे केतु-प्रभावित ग्रहण माना जाएगा। कर्क चंद्रमा की अपनी राशि है, इसलिए विषय हैं घर, माता, भावनात्मक सुरक्षा, संपत्ति और जड़ें। आश्लेषा छिपी बातों के सामने आने का स्वभाव जोड़ता है। अमावस्या के ग्रहण नई शुरुआत के बीज बोते हैं — पर वह शुरुआत पहले कुछ हटाकर आती है।
सर्वाधिक प्रभाव: कर्क और मकर चंद्र राशि पर। भारत: दृश्य नहीं। भारत में दृश्य नहीं — यहाँ सूर्य क्षितिज से नीचे है, इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिर खुले रहेंगे और सामान्य दिनचर्या चलेगी।
12 अगस्त 2026: पूरा समय, सूतक और राशि प्रभाव →🌕 चंद्र ग्रहण — 28 अगस्त 2026
बीत चुकाकुंभ · शतभिषागहरा आंशिक चंद्र ग्रहण, चंद्रमा कुंभ राशि, शतभिषा नक्षत्र में राहु के साथ — यह राहु-ग्रस्त चंद्र ग्रहण है। शतभिषा वैद्य का नक्षत्र है, इसलिए भाव है निदान का: यह स्पष्ट देखना कि आपकी ऊर्जा कहाँ जा रही है। सूर्य ग्रहण के सोलह दिन बाद पड़ने से यह उसी अध्याय को समेटता है।
सर्वाधिक प्रभाव: कुंभ और सिंह चंद्र राशि पर। भारत: दृश्य नहीं। भारत में दृश्य नहीं — ग्रहण के समय चंद्रमा क्षितिज से नीचे रहेगा, इसलिए यहाँ सूतक काल मान्य नहीं होगा।
28 अगस्त 2026: पूरा समय, सूतक और राशि प्रभाव →ग्रहण में क्या करें
करें
- अपने इष्ट मंत्र का जप — ग्रहण काल जप का फल कई गुना करता है।
- ध्यान करें, या बस शांत बैठें।
- ग्रहण के बाद दान करें — अन्न, वस्त्र, या जो निकट में आवश्यक हो।
- ग्रहण समाप्त होने पर स्नान करें।
न करें (जहाँ सूतक लागू हो)
- मुहूर्त वाले कार्य आरंभ न करें — विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार।
- अनुबंध या अपरिवर्तनीय वित्तीय निर्णय इस अवधि में न लें।
- सूर्य ग्रहण को प्रमाणित सोलर चश्मे के बिना न देखें — यह नेत्र सुरक्षा है, ज्योतिष नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में कितने ग्रहण हैं और कब हैं?
2026 में 4 ग्रहण हैं: 17 फरवरी 2026 — सूर्य ग्रहण (वलयाकार ("रिंग ऑफ फायर")); 3 मार्च 2026 — चंद्र ग्रहण (पूर्ण ("ब्लड मून")); 12 अगस्त 2026 — सूर्य ग्रहण (पूर्ण); 28 अगस्त 2026 — चंद्र ग्रहण (आंशिक (93% ढका हुआ))।
2026 का कौन सा ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
चंद्र ग्रहण — 3 मार्च 2026 — पूर्वी राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश) में चंद्रोदय के समय आंशिक रूप से दृश्य — 2026 का एकमात्र ग्रहण जो भारत से दिखा। 2026 के बाकी ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देते, क्योंकि ग्रहण के समय सूर्य या चंद्रमा यहाँ क्षितिज से नीचे रहते हैं।
अगर ग्रहण भारत में दिखाई न दे तो क्या सूतक लगेगा?
नहीं। वैदिक परंपरा में सूतक ग्रहण के आपके स्थान से दृश्य होने पर लगता है, केवल पृथ्वी पर कहीं ग्रहण होने से नहीं। यदि ग्रहण आपके स्थान से दिखाई नहीं देता, तो सूतक मान्य नहीं होता — मंदिर खुले रहते हैं, भोजन सामान्य रूप से बनता और खाया जाता है, कोई विशेष निषेध नहीं। सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण का 9 घंटे पहले आरंभ होता है, पर केवल वहीं जहाँ ग्रहण वास्तव में दिखाई देता है।
अगला ग्रहण कब है? (6 फरवरी 2027)
अगला ग्रहण 6 फरवरी 2027 का सूर्य ग्रहण है — वलयाकार ("रिंग ऑफ फायर") ग्रहण, चरम समय 9:30 PM IST (16:00 UTC)। निरयन (लाहिड़ी) गणना से यह मकर राशि में 23°24′ पर, धनिष्ठा नक्षत्र में पड़ता है। यह भारत में दृश्य नहीं होगा। भारत में दृश्य नहीं — यहाँ सूर्य काफी पहले अस्त हो चुका होगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।
ग्रहण का सबसे अधिक प्रभाव किस राशि पर पड़ता है?
जिस चंद्र राशि में ग्रहण पड़ता है उस पर सबसे सीधा असर होता है, और उसके बाद उसकी सामने वाली राशि पर — क्योंकि ग्रहण की धुरी हमेशा दो भावों को एक साथ सक्रिय करती है। पर सच यह है कि केवल राशि एक मोटा फ़िल्टर है। असली प्रभाव इस बात से तय होता है कि ग्रहण का अंश आपकी कुंडली के किस भाव में और किस जन्म-ग्रह पर गिरता है। शुभ ग्रह पर पड़ा ग्रहण और अशुभ ग्रह पर पड़ा ग्रहण एक ही राशि के दो लोगों के लिए बिल्कुल अलग फल देते हैं।
ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें?
जहाँ ग्रहण दृश्य है और सूतक लागू है: विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार जैसे मुहूर्त वाले कार्य न आरंभ करें; अनुबंध या बड़े वित्तीय निर्णय टालें; मंत्र जप, ध्यान और दान करें — परंपरा मानती है कि ग्रहण काल में इनका फल कई गुना होता है; ग्रहण समाप्त होने पर स्नान करें। सूर्य ग्रहण को प्रमाणित सोलर चश्मे के बिना कभी न देखें — यह नेत्र सुरक्षा है, ज्योतिष नहीं। जहाँ ग्रहण दृश्य नहीं है, वहाँ सूतक के कोई निषेध लागू नहीं होते।
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ग्रहण आपकी कुंडली में कहाँ गिर रहा है?
राशि एक मोटा फ़िल्टर है। ग्रहण का अंश आपकी कुंडली के किसी एक भाव में, अक्सर किसी एक जन्म-ग्रह पर गिरता है — और वही तय करता है कि यह शुरुआत लाएगा या सफ़ाई।