🌕353 दिन बादरक्षाबंधन के दिन

चंद्र ग्रहण17 अगस्त 2027

Chandra Grahan — 17 August 2027

संक्षेप में: 17 अगस्त 2027 का चंद्र ग्रहण भारत में कहीं भी दृश्य नहीं होगा — ग्रहण के पूरे समय चंद्रमा यहाँ क्षितिज से नीचे रहेगा। इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा। रक्षाबंधन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा — जब सूतक ही मान्य नहीं, तो पर्व के समय में कोई बदलाव नहीं।

भारत में क्यों नहीं दिखेगा — पूरा हिसाब

ग्रहण सुबह 10:55 बजे (IST) से शुरू होगा। उस समय तक भारत के हर शहर में चंद्रास्त हो चुका होगा। उस सुबह पूरे देश में सबसे देर से चंद्रास्त सुबह 6:09 बजे होता है। सूतक दृश्यता पर निर्भर करता है, इसलिए यहाँ पालन करने को कुछ नहीं है।

शहरचंद्रास्तग्रहण आरंभदिखेगा?
दिल्ली5:39 AM10:55 AMनहीं — चंद्रास्त हो चुका
मुंबई6:09 AM10:55 AMनहीं — चंद्रास्त हो चुका
कोलकाता5:00 AM10:55 AMनहीं — चंद्रास्त हो चुका
चेन्नई5:45 AM10:55 AMनहीं — चंद्रास्त हो चुका
गुवाहाटी4:42 AM10:55 AMनहीं — चंद्रास्त हो चुका

चंद्रास्त और ग्रहण के समय स्विस एफेमेरिस से 17 अगस्त 2027 के लिए गणना किए गए।

भारतीय समय (IST) में

उपच्छाया आरंभ
10:55 AM
ग्रहण चरम
12:44 PM
उपच्छाया समाप्त
2:33 PM
प्रकार
उपच्छाया
अवधि
3 घंटे 39 मिनट
भारत में दृश्य
नहीं
भारत में सूतक
मान्य नहीं
कहाँ दिखेगा
सबसे अच्छा अमेरिका, प्रशांत और अटलांटिक क्षेत्रों से; यूरोप, पश्चिमी अफ्रीका और उत्तरी एशिया के कुछ भाग चंद्रोदय/चंद्रास्त के निकट इसे देख पाएंगे

ये विश्वव्यापी ग्रहण समय हैं, भारतीय समय में — ग्रहण कब हो रहा है, यह नहीं कि भारत से दिखेगा।

रक्षाबंधन और यह ग्रहण

हर चंद्र ग्रहण पूर्णिमा को ही पड़ता है — चंद्रमा को पृथ्वी की छाया में आने के लिए सूर्य के ठीक सामने होना ज़रूरी है। यह Shravana पूर्णिमा है, यानी रक्षाबंधन यह उपच्छाया ग्रहण है, इसलिए यहाँ सूतक है ही नहीं और पर्व पर कोई असर नहीं — दृश्यता चाहे जो हो, उपच्छाया ग्रहण में सूतक मान्य नहीं होता, इसलिए 17 अगस्त 2027 को किसी भी समय मनाया जा सकता है।

ज्योतिषीय अर्थ

2027 का अंतिम ग्रहण — मकर राशि के बिल्कुल अंत में, फिर से धनिष्ठा नक्षत्र में, लगभग उसी अंश पर जहाँ वर्ष का पहला ग्रहण (6 फरवरी) आरंभ हुआ था। यह अपनी सारोस श्रृंखला (110) का भी अंतिम ग्रहण है, जो सदियों से चल रहे एक चक्र को समाप्त करता है। भारत से अदृश्य और उपच्छाया होने के कारण, इसे देखने योग्य घटना के बजाय एक विराम की तरह पढ़ें — वर्ष के मकर-कर्क ग्रहणों ने करियर और घर की संरचनाओं में जो हलचल मचाई थी, वह यहाँ स्थिर होती है।

राशि
मकर 29°50′
नक्षत्र
धनिष्ठा
तिथि
Shravana Purnima
सर्वाधिक प्रभाव
मकर और कर्क राशि

तो भारत में अगला चंद्र ग्रहण कब दिखेगा?

6 जुलाई 2028 — यही अगला ग्रहण है जिसके समय चंद्रमा भारत में क्षितिज से ऊपर रहेगा, और इसलिए सूतक भी तभी लगेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या 17 अगस्त 2027 का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा?

नहीं। ग्रहण सुबह 10:55 बजे (IST) से शुरू होगा, और उस समय तक भारत के हर शहर में चंद्रास्त हो चुका होगा — उस सुबह भारत में सबसे देर से चंद्रास्त सुबह 6:09 बजे होता है। ग्रहण घटित तो होगा, पर भारत में कोई इसे देख नहीं सकेगा।

17 अगस्त 2027 के ग्रहण का सूतक काल भारत में कब से लगेगा?

सूतक नहीं लगेगा। यह उपच्छाया ग्रहण है और अधिकांश वैदिक परंपराओं में इसे वास्तविक ग्रहण नहीं माना जाता, इसलिए दृश्यता चाहे जो हो, सूतक मान्य नहीं — मंदिर खुले रहेंगे, भोजन बनाना और खाना सामान्य रहेगा, कोई नियम नहीं लगेगा।

क्या 17 अगस्त 2027 के ग्रहण का रक्षाबंधन पर असर पड़ेगा?

नहीं। रक्षाबंधन Shravana पूर्णिमा को पड़ता है, और ग्रहण भी उसी पूर्णिमा पर है — पर यह उपच्छाया ग्रहण है, इसलिए दृश्यता चाहे जो हो, सूतक काल मान्य नहीं। रक्षाबंधन 17 अगस्त 2027 को किसी भी समय, हर साल की तरह मनाया जा सकता है।

17 अगस्त 2027 के चंद्र ग्रहण का समय भारत में क्या है?

भारतीय समय (IST) में ग्रहण सुबह 10:55 बजे से दोपहर 2:33 बजे तक चलेगा, चरम दोपहर 12:44 बजे — कुल 3 घंटे 39 मिनट। ये विश्वव्यापी ग्रहण समय को भारतीय समय में बदलकर दिए गए हैं; इनका अर्थ यह नहीं कि यह भारत से दिखाई देगा।

भारत में अगला चंद्र ग्रहण कब दिखाई देगा?

6 जुलाई 2028 — यही अगला ग्रहण है जिसके समय चंद्रमा भारत में क्षितिज से ऊपर रहेगा, और इसलिए यहाँ सूतक भी तभी लगेगा।

2027 के अन्य ग्रहण

यह ग्रहण आपकी कुंडली में कहाँ पड़ रहा है?

भारत से दिखना सूतक तय करता है — यह नहीं कि ग्रहण आप पर असर करेगा या नहीं। ग्रहण की डिग्री, मकर 29°50′, आपकी कुंडली के किसी एक भाव में और अक्सर किसी ग्रह पर पड़ती है। असली फ़र्क वही तय करता है।