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पूर्वाषाढ़ा

वैदिक ज्योतिष • नक्षत्र 20

जन्म नक्षत्र

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र — स्वामी, देवता और प्रभाव

Purva Ashadha Nakshatra in Hindi

Dhanu Rashi · Lord: Venus · Manushya Gana · Symbol: Elephant Tusk/Fan · Animal: Monkey

देवता

आपस् (जल)

स्वामी ग्रह

शुक्र

गुण

मनुष्य • अग्नि • स्त्री

पद

253.33° — 266.67° (धनु)

प्रतीक

गजदंत / पंखा

पशु / वृक्ष

Monkey • Ashoka

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र — हिंदी में परिचय

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र धनु राशि में स्थित है। यह शुक्र ग्रह द्वारा शासित है और इसके अधिष्ठाता देवता अपस (जल देवता) हैं। यह अजेयता, साहस और घोषणा एवं दृढ़ विश्वास की शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।

क्या आपका जन्म नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा है?

नक्षत्र आपकी कुंडली का एक हिस्सा है। आपकी पूरी कुंडली बताती है कि आपका जन्म चंद्र सच में पूर्वाषाढ़ा में है या नहीं, लग्न और ग्रह उसके साथ कैसे बैठे हैं, अभी कौन-सी दशा चल रही है — और करियर, विवाह व आने वाले वर्षों के लिए इसका क्या अर्थ है।

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पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चार चरण

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चारों चरण धनु राशि में हैं।

चरणराशिअंशनवांश
1धनु13°20′ – 16°40′सिंह
2धनु16°40′ – 20°00′कन्या
3धनु20°00′ – 23°20′तुला
4धनु23°20′ – 26°40′वृश्चिक

चंद्रमा अगली बार पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में कब होगा?

प्रारंभसमाप्त
17 अक्टूबर, शनिवार, 09:4718 अक्टूबर, रविवार, 12:49
13 नवंबर, शुक्रवार, 17:1714 नवंबर, शनिवार, 20:24
10 दिसंबर, गुरुवार, 23:5812 दिसंबर, शनिवार, 03:04

IST

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र: अजेय शक्ति और प्रसार

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र २७ नक्षत्रों में बीसवें स्थान पर है और यह धनु राशि के १३°२०' से २६°४०' तक स्थित है। शुक्र द्वारा शासित और जल के देवता 'अप' (Apah) द्वारा निर्देशित, यह नक्षत्र अपराजित रहने की शक्ति, आकर्षण और जीवन के विस्तार का प्रतीक है।

'पूर्वाषाढ़ा' का अर्थ है 'पहली अजेय' (First Invincible)। इसका प्रतीक 'हाथ का पंखा' (Hand Fan) या 'सूप' है, जो गर्मी को दूर करने, आराम देने और बुराई को छानकर बाहर निकालने की क्षमता को दर्शाता है। यह नक्षत्र प्रभाव, लोकप्रियता और सफलता के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

सकारात्मक लक्षण

  • अत्यधिक आत्मविश्वास, मिलनसार और आकर्षक व्यक्तित्व
  • प्रबल संचार क्षमता और दूसरों को प्रभावित करने की शक्ति
  • लगातार सीखने और जीवन में आगे बढ़ने की इच्छा

चुनौतियां

  • अत्यधिक गर्व और खुद को अजेय समझना
  • दूसरों की सलाह न मानना और अपनी ही जिद पर अड़े रहना
  • कभी-कभी बहुत अधिक अहंकारी और असावधान होना

करियर और वित्त

पूर्वाषाढ़ा जातक कला, मनोरंजन, राजनीति और व्यापार के क्षेत्रों में बहुत सफल होते हैं। वे उत्कृष्ट वक्ता, लेखक, संगीतकार और प्रबंधक बनते हैं। शुक्र का प्रभाव उन्हें विलासिता और सौंदर्य से संबंधित व्यवस्थाओं में भी सफलता दिलाता है।

अनुकूल पेशे:

कला और मनोरंजन (फिल्म/संगीत), राजनीति, समुद्री व्यापार और नेविगेशन, लेखन और संपादन, और प्रबंधन।

विवाह और संबंध

संबंधों में पूर्वाषाढ़ा जातक बहुत रोमांटिक और समर्पित होते हैं। वे अपने साथी से सम्मान और प्रशंसा की अपेक्षा करते हैं। उन्हें एक ऐसे साथी की आवश्यकता होती है जो उनकी महत्वाकांक्षाओं का समर्थन करे। उत्तराषाढ़ा और मूल नक्षत्र के साथ उनकी अनुकूलता बहुत अच्छी रहती है।

उपाय और शांति विधि

शुक्र और जल देव (Apah) की कृपा प्राप्त करने के लिए:

  • प्रत्येक शुक्रवार को देवी लक्ष्मी की पूजा करें।
  • जल का दुरुपयोग न करें और जल स्रोतों का सम्मान करें।
  • सफेद वस्तुओं जैसे कपड़े या इत्र का दान करें।
  • बीज मंत्र: "ॐ पूर्वाषाढ़ायै नमः" का नियमित जाप करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र क्या है?

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र धनु राशि में स्थित है। यह शुक्र ग्रह द्वारा शासित है और इसके अधिष्ठाता देवता अपस (जल देवता) हैं। यह अजेयता, साहस और घोषणा एवं दृढ़ विश्वास की शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी ग्रह शुक्र है और देवता आपस् (जल) हैं।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र की राशि कौन सी है?

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चारों चरण धनु राशि में हैं।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का गण क्या है?

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र मनुष्य गण का है।

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का किस नक्षत्र से कितना मेल

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पूर्वाषाढ़ा चंद्र वालों के लिए — यह पृष्ठ बताता है कि इस नक्षत्र का स्वभाव और शास्त्रीय अर्थ क्या है। जो यह नहीं जान सकता, वह है कि आपका चंद्रमा किस भाव में है, और आपकी कुंडली में नक्षत्र-स्वामी की क्या स्थिति है।

जब नक्षत्र का स्वामी उच्च का और केंद्र में हो, वही नक्षत्र बिलकुल अलग व्यवहार करता है, बनिस्बत उसके जब वह स्वामी नीच का होकर आठवें भाव में बैठा हो। और यही नक्षत्र-स्वामी आपकी पहली दशा खोलता है, जो उसके बाद की पूरी समय-रेखा तय करता है।

रिपोर्ट आपके नक्षत्र को उस कुंडली के संदर्भ में पढ़ती है जिसमें वह बैठा है — उसके स्वामी की स्थिति, वह जिस भाव में पड़ता है, और वह जो दशा-क्रम चलाता है।

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