
वैदिक ज्योतिष • नक्षत्र 8
पुष्य नक्षत्र — स्वामी, देवता और प्रभाव
Pushya Nakshatra in Hindi
Kark Rashi · Lord: Saturn · Deva Gana · Symbol: Flower/Udder · Animal: Goat
देवता
बृहस्पति
स्वामी ग्रह
शनि
गुण
देव • जल • पुरुष
पद
93.33° — 106.67° (कर्क)
प्रतीक
पुष्प/थन
पशु / वृक्ष
Goat • Peepal
पुष्य नक्षत्र — हिंदी में परिचय
पुष्य को सबसे शुभ नक्षत्र माना जाता है। पूरी तरह से कर्क राशि में स्थित यह नक्षत्र, शनि द्वारा शासित है और बृहस्पति (गुरु) इसके अधिष्ठाता हैं। यह पोषण, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास प्रदान करता है।
क्या आपका जन्म नक्षत्र पुष्य है?
नक्षत्र आपकी कुंडली का एक हिस्सा है। आपकी पूरी कुंडली बताती है कि आपका जन्म चंद्र सच में पुष्य में है या नहीं, लग्न और ग्रह उसके साथ कैसे बैठे हैं, अभी कौन-सी दशा चल रही है — और करियर, विवाह व आने वाले वर्षों के लिए इसका क्या अर्थ है।
पुष्य नक्षत्र के चार चरण
पुष्य नक्षत्र के चारों चरण कर्क राशि में हैं।
| चरण | राशि | अंश | नवांश |
|---|---|---|---|
| 1 | कर्क | 3°20′ – 6°40′ | सिंह |
| 2 | कर्क | 6°40′ – 10°00′ | कन्या |
| 3 | कर्क | 10°00′ – 13°20′ | तुला |
| 4 | कर्क | 13°20′ – 16°40′ | वृश्चिक |
चंद्रमा अगली बार पुष्य नक्षत्र में कब होगा?
| प्रारंभ | समाप्त |
|---|---|
| 1 नवंबर, रविवार, 05:40 | 2 नवंबर, सोमवार, 04:31 |
| 28 नवंबर, शनिवार, 12:50 | 29 नवंबर, रविवार, 11:00 |
| 25 दिसंबर, शुक्रवार, 22:50 | 26 दिसंबर, शनिवार, 20:13 |
IST
पुष्य नक्षत्र: नक्षत्रों का राजा
पुष्य नक्षत्र २७ नक्षत्रों में सबसे शुभ माना जाता है और इसे 'नक्षत्रों का राजा' कहा जाता है। यह पूरी तरह से कर्क राशि में ३°२०' से १६°४०' तक स्थित है। शनि द्वारा शासित और बृहस्पति (देवगुरु) द्वारा निर्देशित, यह नक्षत्र सर्वोच्च पोषण, समृद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक है।
'पुष्य' शब्द का अर्थ है 'पोषण करने वाला' या 'शक्तिशाली'। इसका प्रतीक 'गाय का थन' (Flower/Udder) है, जो निस्वार्थ सेवा, प्रचुरता और ममतामयी देखरेख को दर्शाता है। यह नक्षत्र किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को शुरू करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
सकारात्मक लक्षण
- अत्यधिक अनुशासित, धैर्यवान और कर्तव्यनिष्ठ
- दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर
- आध्यात्मिक गहराई और धार्मिक प्रवृत्तियाँ
चुनौतियां
- कभी-कभी बहुत अधिक रूढ़िवादी होना
- दूसरों से बहुत अधिक अपेक्षाएं रखना
- परिवर्तन को स्वीकार करने में कठिनाई
करियर और वित्त
पुष्य जातक उन क्षेत्रों में सफल होते हैं जिनमें पोषण, शिक्षा और धर्म शामिल हो। वे सफल डॉक्टर, शिक्षक, सरकारी अधिकारी, पुजारी और उद्योगपति बनते हैं। उन्हें रियल एस्टेट और डेयरी व्यवसाय में भी सफलता मिलती है।
अनुकूल पेशे:
चिकित्सा, अध्यापन, धार्मिक और आध्यात्मिक नेतृत्व, डेयरी और कृषि व्यवसाय, और उच्च स्तरीय प्रशासनिक सेवाएं।
विवाह और संबंध
संबंधों में पुष्य जातक बहुत वफादार और भावुक होते हैं। वे अपने परिवार की खुशियों के लिए बड़े त्याग कर सकते हैं। हालांकि, उनका अनुशासित स्वभाव कभी-कभी उनके साथी को कठोर लग सकता है। अश्विनी और रोहिणी नक्षत्र के साथ उनकी अनुकूलता उत्कृष्ट होती है।
उपाय और शांति विधि
शनि और गुरु की ऊर्जा को संतुलित करने के लिए:
- प्रत्येक गुरुवार को पीपल के पेड़ की पूजा करें।
- शनिवार को गरीब और जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
- गाय की सेवा करें और उसे चारा खिलाएं।
- बीज मंत्र: "ॐ पुष्याय नमः" का नियमित जाप करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पुष्य नक्षत्र क्या है?
पुष्य को सबसे शुभ नक्षत्र माना जाता है। पूरी तरह से कर्क राशि में स्थित यह नक्षत्र, शनि द्वारा शासित है और बृहस्पति (गुरु) इसके अधिष्ठाता हैं। यह पोषण, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास प्रदान करता है।
पुष्य नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
पुष्य नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है और देवता बृहस्पति हैं।
पुष्य नक्षत्र की राशि कौन सी है?
पुष्य नक्षत्र के चारों चरण कर्क राशि में हैं।
पुष्य नक्षत्र का गण क्या है?
पुष्य नक्षत्र देव गण का है।
पुष्य नक्षत्र का किस नक्षत्र से कितना मेल
हर जोड़े के लिए आठों कूट अलग से गिने गए हैं — अंक पर जाइए। सभी नक्षत्र जोड़े
अन्य नक्षत्र
नक्षत्र पाठ की शुरुआत है, अंत नहीं।
पुष्य चंद्र वालों के लिए — यह पृष्ठ बताता है कि इस नक्षत्र का स्वभाव और शास्त्रीय अर्थ क्या है। जो यह नहीं जान सकता, वह है कि आपका चंद्रमा किस भाव में है, और आपकी कुंडली में नक्षत्र-स्वामी की क्या स्थिति है।
जब नक्षत्र का स्वामी उच्च का और केंद्र में हो, वही नक्षत्र बिलकुल अलग व्यवहार करता है, बनिस्बत उसके जब वह स्वामी नीच का होकर आठवें भाव में बैठा हो। और यही नक्षत्र-स्वामी आपकी पहली दशा खोलता है, जो उसके बाद की पूरी समय-रेखा तय करता है।
रिपोर्ट आपके नक्षत्र को उस कुंडली के संदर्भ में पढ़ती है जिसमें वह बैठा है — उसके स्वामी की स्थिति, वह जिस भाव में पड़ता है, और वह जो दशा-क्रम चलाता है।
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