
वैदिक ज्योतिष • नक्षत्र 7
पुनर्वसु नक्षत्र — स्वामी, देवता और प्रभाव
Punarvasu Nakshatra in Hindi
Mithun/Kark Rashi · Lord: Jupiter · Deva Gana · Symbol: Bow/Quiver · Animal: Cat
देवता
अदिति
स्वामी ग्रह
गुरु
गुण
देव • वायु/जल • पुरुष
पद
80° — 93.33° (मिथुन/कर्क)
प्रतीक
धनुष/तरकश
पशु / वृक्ष
Cat • Bamboo
पुनर्वसु नक्षत्र — हिंदी में परिचय
पुनर्वसु मिथुन और कर्क राशि तक फैला हुआ है। इसके स्वामी ग्रह गुरु (बृहस्पति) हैं और इसकी अधिष्ठात्री देवी अदिति (देवताओं की माता) हैं। यह नक्षत्र नवीनीकरण, सद्गुणों की ओर वापसी और आध्यात्मिक ज्ञान को दर्शाता है।
क्या आपका जन्म नक्षत्र पुनर्वसु है?
नक्षत्र आपकी कुंडली का एक हिस्सा है। आपकी पूरी कुंडली बताती है कि आपका जन्म चंद्र सच में पुनर्वसु में है या नहीं, लग्न और ग्रह उसके साथ कैसे बैठे हैं, अभी कौन-सी दशा चल रही है — और करियर, विवाह व आने वाले वर्षों के लिए इसका क्या अर्थ है।
पुनर्वसु नक्षत्र के चार चरण
पुनर्वसु नक्षत्र के चरण 1–3 मिथुन राशि में और चरण 4 कर्क राशि में हैं।
| चरण | राशि | अंश | नवांश |
|---|---|---|---|
| 1 | मिथुन | 20°00′ – 23°20′ | मेष |
| 2 | मिथुन | 23°20′ – 26°40′ | वृषभ |
| 3 | मिथुन | 26°40′ – 30°00′ | मिथुन |
| 4 | कर्क | 0°00′ – 3°20′ | कर्क |
चंद्रमा अगली बार पुनर्वसु नक्षत्र में कब होगा?
| प्रारंभ | समाप्त |
|---|---|
| 31 अक्टूबर, शनिवार, 07:12 | 1 नवंबर, रविवार, 05:40 |
| 27 नवंबर, शुक्रवार, 15:09 | 28 नवंबर, शनिवार, 12:50 |
| 25 दिसंबर, शुक्रवार, 01:47 | 25 दिसंबर, शुक्रवार, 22:50 |
IST
पुनर्वसु नक्षत्र: प्रकाश की वापसी
पुनर्वसु नक्षत्र २७ नक्षत्रों में सातवें स्थान पर है। यह मिथुन राशि के २०°००' से कर्क राशि के ३°२०' तक फैला हुआ है। बृहस्पति (गुरु) द्वारा शासित और अदिति (देवताओं की माता) द्वारा निर्देशित, यह नक्षत्र नवीनीकरण, उदारता और सुरक्षित वापसी का प्रतीक है।
'पुनर्वसु' का अर्थ है 'पुनः बसना' या 'प्रकाश की वापसी'। इसका प्रतीक 'धनुष' (Bow) और 'तरकश' (Quiver) है, जो ऊर्जा के संचय और सही समय पर उसके उपयोग की शक्ति को दर्शाता है। यह नक्षत्र आध्यात्मिक विकास और भौतिक प्रचुरता के बीच संतुलन का प्रतिनिधित्व करता है।
सकारात्मक लक्षण
- दयालु, उदार और उच्च नैतिक मूल्यों वाले
- धैर्यवान और किसी भी परिस्थिति से उबरने में सक्षम
- संतोषी और सरल जीवन जीने वाले
चुनौतियां
- अत्यधिक सादगी के कारण लाभ उठाने दिया जाना
- कभी-कभी बहुत अधिक आदर्शवादी होना
- परिवर्तन के प्रति थोड़ा प्रतिरोधी होना
करियर और वित्त
पुनर्वसु जातक अध्यापन, परामर्श, लेखन और आध्यात्मिक क्षेत्रों में बहुत सफल होते हैं। वे उत्कृष्ट दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक, वास्तुकार और परोपकारी संगठनों के नेता बनते हैं। गुरु का प्रभाव उन्हें शिक्षा और प्रशासन में उच्च पदों पर लाता है।
अनुकूल पेशे:
शिक्षा और अनुसंधान, अध्यापन, मनोविज्ञान, सामाजिक कार्य, वास्तुकला और नागरिक उड्डयन।
विवाह और संबंध
पुनर्वसु जातक अपने परिवार के प्रति बहुत समर्पित होते हैं। वे अपने रिश्तों में सामंजस्य और शांति बनाए रखने की पूरी कोशिश करते हैं। उन्हें एक ऐसे साथी की आवश्यकता होती है जो उनकी सादगी और नैतिक मूल्यों का सम्मान करे। मृगशिरा और पुष्य नक्षत्र के साथ उनकी अनुकूलता बहुत अच्छी होती है।
उपाय और शांति विधि
गुरु (बृहस्पति) और अदिति माता का आशीर्वाद पाने के लिए:
- प्रत्येक गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करें।
- पीले रंग के फूलों और केसर का तिलक लगाएं।
- गुरुओं और बड़ों का सम्मान करें।
- बीज मंत्र: "ॐ पुनर्वसवे नमः" का नियमित जाप करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पुनर्वसु नक्षत्र क्या है?
पुनर्वसु मिथुन और कर्क राशि तक फैला हुआ है। इसके स्वामी ग्रह गुरु (बृहस्पति) हैं और इसकी अधिष्ठात्री देवी अदिति (देवताओं की माता) हैं। यह नक्षत्र नवीनीकरण, सद्गुणों की ओर वापसी और आध्यात्मिक ज्ञान को दर्शाता है।
पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी ग्रह गुरु है और देवता अदिति हैं।
पुनर्वसु नक्षत्र की राशि कौन सी है?
पुनर्वसु नक्षत्र के चरण 1–3 मिथुन राशि में और चरण 4 कर्क राशि में हैं।
पुनर्वसु नक्षत्र का गण क्या है?
पुनर्वसु नक्षत्र देव गण का है।
पुनर्वसु नक्षत्र का किस नक्षत्र से कितना मेल
हर जोड़े के लिए आठों कूट अलग से गिने गए हैं — अंक पर जाइए। सभी नक्षत्र जोड़े
नक्षत्र पाठ की शुरुआत है, अंत नहीं।
पुनर्वसु चंद्र वालों के लिए — यह पृष्ठ बताता है कि इस नक्षत्र का स्वभाव और शास्त्रीय अर्थ क्या है। जो यह नहीं जान सकता, वह है कि आपका चंद्रमा किस भाव में है, और आपकी कुंडली में नक्षत्र-स्वामी की क्या स्थिति है।
जब नक्षत्र का स्वामी उच्च का और केंद्र में हो, वही नक्षत्र बिलकुल अलग व्यवहार करता है, बनिस्बत उसके जब वह स्वामी नीच का होकर आठवें भाव में बैठा हो। और यही नक्षत्र-स्वामी आपकी पहली दशा खोलता है, जो उसके बाद की पूरी समय-रेखा तय करता है।
रिपोर्ट आपके नक्षत्र को उस कुंडली के संदर्भ में पढ़ती है जिसमें वह बैठा है — उसके स्वामी की स्थिति, वह जिस भाव में पड़ता है, और वह जो दशा-क्रम चलाता है।
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