पुनर्वसु — विशाखा नक्षत्र मिलान

पुनर्वसु नक्षत्र और विशाखा नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 18 अंक मिलते हैं (50%) — स्वीकार्य मेल। आठ में सबसे मज़बूत नाड़ी कूट है। पुनर्वसु नक्षत्र से विशाखा 10वाँ नक्षत्र है।

18

अंक / 36

स्वीकार्य मेल

प्रतिशत: 50%

विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36

क्या यह 18/36 आप पर भी लागू होता है?

यह पृष्ठ केवल पुनर्वसु — विशाखा नक्षत्रों से गिना गया है। तारा (दिन) कूट यहाँ 0/3 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।

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दोनों नक्षत्रों का विवरण

पुनर्वसुविशाखा
स्वामी ग्रहगुरुगुरु
राशिमिथुन/कर्कतुला/वृश्चिक
गणदेवराक्षस
योनिमार्जारव्याघ्र
नाड़ीआदिअन्त्य
तत्ववायुवायु
देवताअदितिइंद्रग्नि
प्रतीकधनुष/तरकशविजय तोरण
राशि विस्तार80°00' – 93°20'200°00' – 213°20'

आठ कूट — अंकों का विवरण

अंक / 36पुनर्वसुविशाखा
1/1वर्ण कूट
पूरे अंक
वायुवायु
2/2वश्य कूट
पूरे अंक
मिथुन/कर्कतुला/वृश्चिक
0/3तारा (दिन) कूट
शून्य अंक
10वाँ19वाँ
2/4योनि कूट
आंशिक
मार्जारव्याघ्र
5/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी)
पूरे अंक
बुधशुक्र
0/6गण कूट
शून्य अंक
देवराक्षस
0/7भकूट (राशि) कूट
भकूट दोष
पाँचवीं9वीं
8/8नाड़ी कूट
पूरे अंक
आदिअन्त्य

अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान

अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।

रज्जुउदर·उदरनहीं

दोनों उदर रज्जु में — एक ही रज्जु, इसे सबसे गंभीरता से देखा जाता है।

वेधउत्तराषाढ़ा·वेध नहींहै

पुनर्वसु का वेध उत्तराषाढ़ा है; विशाखा नहीं।

महेंद्र19वाँ·4·7·10·13·16·19·22·25है

विशाखा नक्षत्र से पुनर्वसु 19वाँ है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।

स्त्री-दीर्घ19वाँ·7 से अधिकहै

सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 19 है।

योनि लिंग (काणम्)पुरुष·स्त्रीहै

दोनों नक्षत्रों का लिंग अलग है — यह संयोग श्रेष्ठ माना जाता है।

इस मेल को क्या तय करता है

स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन

देव — राक्षस गण, 0/6। अलग स्वभाव; बदलने के बजाय स्वीकारना काम आता है।

मन और निर्णय

राशि स्वामी बुध — शुक्र, मैत्री, 5/5। पैसे और काम के निर्णय आसानी से बनते हैं।

शरीर, स्वास्थ्य और संतान

नाड़ी आदि — अन्त्य, योनि मार्जार — व्याघ्र। इस स्तर पर अलग उपाय की ज़रूरत नहीं।

दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं

पुनर्वसु: स्वामी गुरु, देवता अदिति, प्रतीक धनुष/तरकश, देव गण, मिथुन/कर्क राशि। विशाखा: स्वामी गुरु, देवता इंद्रग्नि, प्रतीक विजय तोरण, राक्षस गण, तुला/वृश्चिक राशि।

दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा

पुनर्वसु नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में विशाखा 20वाँ स्थान पर है; पुनर्वसु के लिए सबसे अधिक स्वाती (27/36), सबसे कम ज्येष्ठा (4.5/36), 18 से ऊपर 20 नक्षत्र। विशाखा के 26 में पुनर्वसु 17वाँ स्थान पर; विशाखा के लिए सबसे अधिक धनिष्ठा (30.5/36), सबसे कम रेवती (5.5/36), 18 से ऊपर 17।

नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ

पुनर्वसु नक्षत्र को कन्या का मानकर गिना गया है। क्रम बदलने पर भी 18/36 वही — आठ में सात कूट क्रम नहीं देखते, वर्ण भी यहाँ नहीं बदलता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुनर्वसु — विशाखा मिलान में कितने अंक हैं?+

36 में से 18 (50%) — स्वीकार्य मेल। यह पारंपरिक सीमा 18 से ऊपर है।

इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+

तारा (दिन) कूट — 0/3। सबसे अधिक नाड़ी कूट — 8/8।

पुनर्वसु — विशाखा के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+

पुनर्वसु नक्षत्र से विशाखा 10वाँ; विशाखा नक्षत्र से पुनर्वसु 19वाँ। राशि के स्तर पर पाँचवीं — 9वीं।

क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+

नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।

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