पुनर्वसु — रोहिणी नक्षत्र मिलान
पुनर्वसु नक्षत्र और रोहिणी नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 22.5 अंक मिलते हैं (63%) — स्वीकार्य मेल। आठ में सबसे मज़बूत नाड़ी कूट है। पुनर्वसु नक्षत्र से रोहिणी 25वाँ नक्षत्र है।
22.5
अंक / 36
प्रतिशत: 63%
विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36
क्या यह 22.5/36 आप पर भी लागू होता है?
यह पृष्ठ केवल पुनर्वसु — रोहिणी नक्षत्रों से गिना गया है। वर्ण कूट यहाँ 0/1 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।
दोनों नक्षत्रों का विवरण
| पुनर्वसु | रोहिणी | |
|---|---|---|
| स्वामी ग्रह | गुरु | चंद्रमा |
| राशि | मिथुन/कर्क | वृषभ |
| गण | देव | मनुष्य |
| योनि | मार्जार | सर्प |
| नाड़ी | आदि | अन्त्य |
| तत्व | वायु | पृथ्वी |
| देवता | अदिति | ब्रह्मा |
| प्रतीक | धनुष/तरकश | रथ |
| राशि विस्तार | 80°00' – 93°20' | 40°00' – 53°20' |
आठ कूट — अंकों का विवरण
| अंक / 36 | पुनर्वसु | रोहिणी |
|---|---|---|
0/1वर्ण कूट शून्य अंक | वायु | पृथ्वी |
1/2वश्य कूट आंशिक | मिथुन/कर्क | वृषभ |
1.5/3तारा (दिन) कूट आंशिक | 25वाँ | चौथा |
2/4योनि कूट आंशिक | मार्जार | सर्प |
5/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी) पूरे अंक | बुध | शुक्र |
5/6गण कूट आंशिक | देव | मनुष्य |
0/7भकूट (राशि) कूट भकूट दोष | 12वीं | दूसरी |
8/8नाड़ी कूट पूरे अंक | आदि | अन्त्य |
अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान
अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।
उदर — कंठ, अलग रज्जु।
पुनर्वसु का वेध उत्तराषाढ़ा है; रोहिणी नहीं।
रोहिणी नक्षत्र से पुनर्वसु चौथा है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।
सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 4 है।
दोनों नक्षत्रों का लिंग अलग है — यह संयोग श्रेष्ठ माना जाता है।
इस मेल को क्या तय करता है
स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन
मिथुन/कर्क — वृषभ, अंतर 12-2: भकूट दोष। पारिवारिक निर्णय बात करके तय करने होंगे।
मन और निर्णय
राशि स्वामी बुध — शुक्र, मैत्री, 5/5। पैसे और काम के निर्णय आसानी से बनते हैं।
शरीर, स्वास्थ्य और संतान
नाड़ी आदि — अन्त्य, योनि मार्जार — सर्प। इस स्तर पर अलग उपाय की ज़रूरत नहीं।
दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं
पुनर्वसु: स्वामी गुरु, देवता अदिति, प्रतीक धनुष/तरकश, देव गण, मिथुन/कर्क राशि। रोहिणी: स्वामी चंद्रमा, देवता ब्रह्मा, प्रतीक रथ, मनुष्य गण, वृषभ राशि।
दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा
पुनर्वसु नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में रोहिणी 13वाँ स्थान पर है; पुनर्वसु के लिए सबसे अधिक स्वाती (27/36), सबसे कम ज्येष्ठा (4.5/36), 18 से ऊपर 20 नक्षत्र। रोहिणी के 26 में पुनर्वसु 11वाँ स्थान पर; रोहिणी के लिए सबसे अधिक मृगशिरा (35/36), सबसे कम उत्तराषाढ़ा (11/36), 18 से ऊपर 17।
नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ
पुनर्वसु नक्षत्र को कन्या का मानकर 22.5/36। रोहिणी को कन्या का मानें तो केवल वर्ण बदलकर 23.5/36। उस एक अंक के लिए अलग पृष्ठ नहीं — दोनों पाठ यहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पुनर्वसु — रोहिणी मिलान में कितने अंक हैं?+
36 में से 22.5 (63%) — स्वीकार्य मेल। यह पारंपरिक सीमा 18 से ऊपर है।
इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+
वर्ण कूट — 0/1। सबसे अधिक नाड़ी कूट — 8/8।
पुनर्वसु — रोहिणी के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+
पुनर्वसु नक्षत्र से रोहिणी 25वाँ; रोहिणी नक्षत्र से पुनर्वसु चौथा। राशि के स्तर पर 12वीं — दूसरी।
क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+
नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।