रोहिणी — शतभिषा नक्षत्र मिलान
रोहिणी नक्षत्र और शतभिषा नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 26.5 अंक मिलते हैं (74%) — बहुत अच्छा मेल। आठ में सबसे मज़बूत नाड़ी कूट है। रोहिणी नक्षत्र से शतभिषा 21वाँ नक्षत्र है।
26.5
अंक / 36
प्रतिशत: 74%
विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36
क्या यह 26.5/36 आप पर भी लागू होता है?
यह पृष्ठ केवल रोहिणी — शतभिषा नक्षत्रों से गिना गया है। गण कूट यहाँ 1/6 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।
दोनों नक्षत्रों का विवरण
| रोहिणी | शतभिषा | |
|---|---|---|
| स्वामी ग्रह | चंद्रमा | राहु |
| राशि | वृषभ | कुंभ |
| गण | मनुष्य | राक्षस |
| योनि | सर्प | अश्व |
| नाड़ी | अन्त्य | आदि |
| तत्व | पृथ्वी | वायु |
| देवता | ब्रह्मा | वरुण |
| प्रतीक | रथ | खाली वृत्त / 1000 फूल |
| राशि विस्तार | 40°00' – 53°20' | 306°40' – 320°00' |
आठ कूट — अंकों का विवरण
| अंक / 36 | रोहिणी | शतभिषा |
|---|---|---|
1/1वर्ण कूट पूरे अंक | पृथ्वी | वायु |
1/2वश्य कूट आंशिक | वृषभ | कुंभ |
1.5/3तारा (दिन) कूट आंशिक | 21वाँ | 8वाँ |
2/4योनि कूट आंशिक | सर्प | अश्व |
5/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी) पूरे अंक | शुक्र | शनि |
1/6गण कूट कम | मनुष्य | राक्षस |
7/7भकूट (राशि) कूट पूरे अंक | 10वीं | चौथी |
8/8नाड़ी कूट पूरे अंक | अन्त्य | आदि |
अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान
अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।
दोनों कंठ रज्जु में — एक ही रज्जु, इसे सबसे गंभीरता से देखा जाता है।
रोहिणी का वेध स्वाती है; शतभिषा नहीं।
शतभिषा नक्षत्र से रोहिणी 8वाँ है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।
सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 8 है।
दोनों नक्षत्रों का लिंग अलग है — यह संयोग श्रेष्ठ माना जाता है।
इस मेल को क्या तय करता है
स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन
मनुष्य — राक्षस गण, 1/6। अलग स्वभाव; बदलने के बजाय स्वीकारना काम आता है।
मन और निर्णय
राशि स्वामी शुक्र — शनि, मैत्री, 5/5। पैसे और काम के निर्णय आसानी से बनते हैं।
शरीर, स्वास्थ्य और संतान
नाड़ी अन्त्य — आदि, योनि सर्प — अश्व। इस स्तर पर अलग उपाय की ज़रूरत नहीं।
दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं
रोहिणी: स्वामी चंद्रमा, देवता ब्रह्मा, प्रतीक रथ, मनुष्य गण, वृषभ राशि। शतभिषा: स्वामी राहु, देवता वरुण, प्रतीक खाली वृत्त / 1000 फूल, राक्षस गण, कुंभ राशि।
दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा
रोहिणी नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में शतभिषा चौथा स्थान पर है; रोहिणी के लिए सबसे अधिक मृगशिरा (35/36), सबसे कम उत्तराषाढ़ा (11/36), 18 से ऊपर 17 नक्षत्र। शतभिषा के 26 में रोहिणी चौथा स्थान पर; शतभिषा के लिए सबसे अधिक विशाखा (27/36), सबसे कम हस्त (7.5/36), 18 से ऊपर 15।
नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ
रोहिणी नक्षत्र को कन्या का मानकर 26.5/36। शतभिषा को कन्या का मानें तो केवल वर्ण बदलकर 25.5/36। उस एक अंक के लिए अलग पृष्ठ नहीं — दोनों पाठ यहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रोहिणी — शतभिषा मिलान में कितने अंक हैं?+
36 में से 26.5 (74%) — बहुत अच्छा मेल। यह पारंपरिक सीमा 18 से ऊपर है।
इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+
गण कूट — 1/6। सबसे अधिक नाड़ी कूट — 8/8।
रोहिणी — शतभिषा के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+
रोहिणी नक्षत्र से शतभिषा 21वाँ; शतभिषा नक्षत्र से रोहिणी 8वाँ। राशि के स्तर पर 10वीं — चौथी।
क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+
नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।