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शतभिषा

वैदिक ज्योतिष • नक्षत्र 24

जन्म नक्षत्र

शतभिषा नक्षत्र — स्वामी, देवता और प्रभाव

Shatabhisha Nakshatra in Hindi

Kumbh Rashi · Lord: Rahu · Rakshasa Gana · Symbol: Empty Circle/1000 Flowers · Animal: Horse

देवता

वरुण

स्वामी ग्रह

राहु

गुण

राक्षस • वायु • पुरुष

पद

306.67° — 320° (कुंभ)

प्रतीक

खाली वृत्त / 1000 फूल

पशु / वृक्ष

Horse • Kadamba

शतभिषा नक्षत्र — हिंदी में परिचय

शतभिषा कुंभ राशि में स्थित है। इसका स्वामी राहु है और वरुण देव (जल के देवता) इसके अधिष्ठाता हैं। यह उपचार, रहस्यवाद और अपरंपरागत तरीकों से रोगमुक्ति की क्षमता का प्रतिनिधित्व करती है। इसे 'शत वैद्य' के रूप में भी जाना जाता है।

क्या आपका जन्म नक्षत्र शतभिषा है?

नक्षत्र आपकी कुंडली का एक हिस्सा है। आपकी पूरी कुंडली बताती है कि आपका जन्म चंद्र सच में शतभिषा में है या नहीं, लग्न और ग्रह उसके साथ कैसे बैठे हैं, अभी कौन-सी दशा चल रही है — और करियर, विवाह व आने वाले वर्षों के लिए इसका क्या अर्थ है।

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शतभिषा नक्षत्र के चार चरण

शतभिषा नक्षत्र के चारों चरण कुंभ राशि में हैं।

चरणराशिअंशनवांश
1कुंभ6°40′ – 10°00′धनु
2कुंभ10°00′ – 13°20′मकर
3कुंभ13°20′ – 16°40′कुंभ
4कुंभ16°40′ – 20°00′मीन

चंद्रमा अगली बार शतभिषा नक्षत्र में कब होगा?

प्रारंभसमाप्त
21 अक्टूबर, बुधवार, 19:4822 अक्टूबर, गुरुवार, 20:49
18 नवंबर, बुधवार, 04:3519 नवंबर, गुरुवार, 06:10
15 दिसंबर, मंगलवार, 11:5316 दिसंबर, बुधवार, 14:02

IST

शतभिषा नक्षत्र: सौ चिकित्सक और रहस्य

शतभिषा नक्षत्र २७ नक्षत्रों में चौबीसवें स्थान पर है और यह पूरी तरह से कुंभ राशि में ६°४०' से २०°००' तक स्थित है। राहु द्वारा शासित और जल के देवता वरुण (Varuna) द्वारा निर्देशित, यह नक्षत्र चिकित्सा, रहस्य और ब्रह्मांडीय नियम का प्रतीक है।

'शतभिषा' का अर्थ है 'सौ चिकित्सक' (Hundred Healers) या 'सौ औषधियां'। इसका प्रतीक 'खाली वृत्त' (Empty Circle) है, जो अनंतता, गोपनीयता और छिपे हुए सत्यों को खोजने की क्षमता को दर्शाता है। यह नक्षत्र हीलिंग, शोध और विज्ञान के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।

सकारात्मक लक्षण

  • अत्यधिक बुद्धिमान, दूरदर्शी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
  • स्वभाविक हीलर और मानवीय सेवा के प्रति समर्पित
  • स्वतंत्र विचारक और परंपराओं से हटकर काम करने वाले

चुनौतियां

  • अत्यधिक गुप्त और दूसरों से कटे हुए रहना
  • शारीरिक और मानसिक रूप से एकाकीपन महसूस करना
  • निर्णय लेने में असमंजस और वैचारिक भटकाव

करियर और वित्त

शतभिषा जातक चिकित्सा, शोध, विज्ञान और उच्च तकनीक (High-Tech) के क्षेत्रों में बहुत सफल होते हैं। वे उत्कृष्ट डॉक्टर, अंतरिक्ष वैज्ञानिक, सॉफ्टवेयर इंजीनियर और मनोवैज्ञानिक बनते हैं। राहु का प्रभाव उन्हें भविष्यवादी विषयों और लीक से हटकर व्यापार में सफलता दिलाता है।

अनुकूल पेशे:

चिकित्सा और औषध विज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान, अंतरिक्ष विज्ञान और खगोल विज्ञान, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, और मनोविज्ञान।

विवाह और संबंध

संबंधों में शतभिषा जातक थोड़े जटिल हो सकते हैं क्योंकि वे अपनी गहरी गोपनीयता बनाए रखना पसंद करते हैं। उन्हें एक ऐसे साथी की आवश्यकता होती है जो उनके बौद्धिक स्तर को समझ सके और उन्हें भावनात्मक सहारा दे सके। धनिष्ठा और रोहिणी नक्षत्र के साथ उनकी अनुकूलता अच्छी रहती है।

उपाय और शांति विधि

राहु को संतुलित करने और वरुण देव का आशीर्वाद पाने के लिए:

  • भगवान शिव की पूजा करें और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
  • समुद्र या बहते हुए पानी के किनारे समय बिताएं।
  • गरीबों की चिकित्सा में मदद करें या दवाएं दान करें।
  • बीज मंत्र: "ॐ शतभिषाय नमः" का नियमित जाप करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शतभिषा नक्षत्र क्या है?

शतभिषा कुंभ राशि में स्थित है। इसका स्वामी राहु है और वरुण देव (जल के देवता) इसके अधिष्ठाता हैं। यह उपचार, रहस्यवाद और अपरंपरागत तरीकों से रोगमुक्ति की क्षमता का प्रतिनिधित्व करती है। इसे 'शत वैद्य' के रूप में भी जाना जाता है।

शतभिषा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?

शतभिषा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु है और देवता वरुण हैं।

शतभिषा नक्षत्र की राशि कौन सी है?

शतभिषा नक्षत्र के चारों चरण कुंभ राशि में हैं।

शतभिषा नक्षत्र का गण क्या है?

शतभिषा नक्षत्र राक्षस गण का है।

शतभिषा नक्षत्र का किस नक्षत्र से कितना मेल

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शतभिषा चंद्र वालों के लिए — यह पृष्ठ बताता है कि इस नक्षत्र का स्वभाव और शास्त्रीय अर्थ क्या है। जो यह नहीं जान सकता, वह है कि आपका चंद्रमा किस भाव में है, और आपकी कुंडली में नक्षत्र-स्वामी की क्या स्थिति है।

जब नक्षत्र का स्वामी उच्च का और केंद्र में हो, वही नक्षत्र बिलकुल अलग व्यवहार करता है, बनिस्बत उसके जब वह स्वामी नीच का होकर आठवें भाव में बैठा हो। और यही नक्षत्र-स्वामी आपकी पहली दशा खोलता है, जो उसके बाद की पूरी समय-रेखा तय करता है।

रिपोर्ट आपके नक्षत्र को उस कुंडली के संदर्भ में पढ़ती है जिसमें वह बैठा है — उसके स्वामी की स्थिति, वह जिस भाव में पड़ता है, और वह जो दशा-क्रम चलाता है।

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