मृगशिरा — रोहिणी नक्षत्र मिलान

मृगशिरा नक्षत्र और रोहिणी नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 35 अंक मिलते हैं (97%) — उत्तम मेल। आठ में सबसे मज़बूत नाड़ी कूट है। मृगशिरा नक्षत्र से रोहिणी 27वाँ नक्षत्र है।

35

अंक / 36

उत्तम मेल

प्रतिशत: 97%

विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36

क्या यह 35/36 आप पर भी लागू होता है?

यह पृष्ठ केवल मृगशिरा — रोहिणी नक्षत्रों से गिना गया है। गण कूट यहाँ 5/6 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।

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दोनों नक्षत्रों का विवरण

मृगशिरारोहिणी
स्वामी ग्रहमंगलचंद्रमा
राशिवृषभ/मिथुनवृषभ
गणदेवमनुष्य
योनिसर्पसर्प
नाड़ीमध्यअन्त्य
तत्वपृथ्वीपृथ्वी
देवतासोमब्रह्मा
प्रतीकमृगशीर्षरथ
राशि विस्तार53°20' – 66°40'40°00' – 53°20'

आठ कूट — अंकों का विवरण

अंक / 36मृगशिरारोहिणी
1/1वर्ण कूट
पूरे अंक
पृथ्वीपृथ्वी
2/2वश्य कूट
पूरे अंक
वृषभ/मिथुनवृषभ
3/3तारा (दिन) कूट
पूरे अंक
27वाँदूसरा
4/4योनि कूट
एक ही योनि
सर्पसर्प
5/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी)
पूरे अंक
शुक्रशुक्र
5/6गण कूट
आंशिक
देवमनुष्य
7/7भकूट (राशि) कूट
पूरे अंक
पहलीपहली
8/8नाड़ी कूट
पूरे अंक
मध्यअन्त्य

अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान

अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।

रज्जुशिरो·कंठहै

शिरो — कंठ, अलग रज्जु।

वेधधनिष्ठा·वेध नहींहै

मृगशिरा का वेध धनिष्ठा है; रोहिणी नहीं।

महेंद्रदूसरा·4·7·10·13·16·19·22·25नहीं

रोहिणी नक्षत्र से मृगशिरा दूसरा है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।

स्त्री-दीर्घदूसरा·7 से अधिकनहीं

सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 2 है।

योनि लिंग (काणम्)पुरुष·स्त्रीहै

दोनों नक्षत्रों का लिंग अलग है — यह संयोग श्रेष्ठ माना जाता है।

इस मेल को क्या तय करता है

स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन

देव — मनुष्य गण, 5/6। तटस्थ: न अपने आप तालमेल, न टकराव।

मन और निर्णय

राशि स्वामी शुक्र — शुक्र, मैत्री, 5/5। पैसे और काम के निर्णय आसानी से बनते हैं।

शरीर, स्वास्थ्य और संतान

नाड़ी मध्य — अन्त्य, योनि सर्प — सर्प। इस स्तर पर अलग उपाय की ज़रूरत नहीं।

दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं

मृगशिरा: स्वामी मंगल, देवता सोम, प्रतीक मृगशीर्ष, देव गण, वृषभ/मिथुन राशि। रोहिणी: स्वामी चंद्रमा, देवता ब्रह्मा, प्रतीक रथ, मनुष्य गण, वृषभ राशि।

दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा

मृगशिरा नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में रोहिणी पहला स्थान पर है; मृगशिरा के लिए सबसे अधिक रोहिणी (35/36), सबसे कम चित्रा (9/36), 18 से ऊपर 16 नक्षत्र। रोहिणी के 26 में मृगशिरा पहला स्थान पर; रोहिणी के लिए सबसे अधिक मृगशिरा (35/36), सबसे कम उत्तराषाढ़ा (11/36), 18 से ऊपर 17।

नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ

मृगशिरा नक्षत्र को कन्या का मानकर गिना गया है। क्रम बदलने पर भी 35/36 वही — आठ में सात कूट क्रम नहीं देखते, वर्ण भी यहाँ नहीं बदलता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मृगशिरा — रोहिणी मिलान में कितने अंक हैं?+

36 में से 35 (97%) — उत्तम मेल। यह पारंपरिक सीमा 18 से ऊपर है।

इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+

गण कूट — 5/6। सबसे अधिक नाड़ी कूट — 8/8।

मृगशिरा — रोहिणी के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+

मृगशिरा नक्षत्र से रोहिणी 27वाँ; रोहिणी नक्षत्र से मृगशिरा दूसरा। राशि के स्तर पर पहली — पहली।

क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+

नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।

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