मृगशिरा — विशाखा नक्षत्र मिलान
मृगशिरा नक्षत्र और विशाखा नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 18.5 अंक मिलते हैं (51%) — स्वीकार्य मेल। आठ में सबसे मज़बूत नाड़ी कूट है। मृगशिरा नक्षत्र से विशाखा 12वाँ नक्षत्र है।
18.5
अंक / 36
प्रतिशत: 51%
विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36
क्या यह 18.5/36 आप पर भी लागू होता है?
यह पृष्ठ केवल मृगशिरा — विशाखा नक्षत्रों से गिना गया है। गण कूट यहाँ 0/6 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।
दोनों नक्षत्रों का विवरण
| मृगशिरा | विशाखा | |
|---|---|---|
| स्वामी ग्रह | मंगल | गुरु |
| राशि | वृषभ/मिथुन | तुला/वृश्चिक |
| गण | देव | राक्षस |
| योनि | सर्प | व्याघ्र |
| नाड़ी | मध्य | अन्त्य |
| तत्व | पृथ्वी | वायु |
| देवता | सोम | इंद्रग्नि |
| प्रतीक | मृगशीर्ष | विजय तोरण |
| राशि विस्तार | 53°20' – 66°40' | 200°00' – 213°20' |
आठ कूट — अंकों का विवरण
| अंक / 36 | मृगशिरा | विशाखा |
|---|---|---|
1/1वर्ण कूट पूरे अंक | पृथ्वी | वायु |
1/2वश्य कूट आंशिक | वृषभ/मिथुन | तुला/वृश्चिक |
1.5/3तारा (दिन) कूट आंशिक | 12वाँ | 17वाँ |
2/4योनि कूट आंशिक | सर्प | व्याघ्र |
5/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी) पूरे अंक | शुक्र | शुक्र |
0/6गण कूट शून्य अंक | देव | राक्षस |
0/7भकूट (राशि) कूट भकूट दोष | छठी | 8वीं |
8/8नाड़ी कूट पूरे अंक | मध्य | अन्त्य |
अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान
अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।
शिरो — उदर, अलग रज्जु।
मृगशिरा का वेध धनिष्ठा है; विशाखा नहीं।
विशाखा नक्षत्र से मृगशिरा 17वाँ है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।
सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 17 है।
दोनों नक्षत्रों का लिंग अलग है — यह संयोग श्रेष्ठ माना जाता है।
इस मेल को क्या तय करता है
स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन
देव — राक्षस गण, 0/6। अलग स्वभाव; बदलने के बजाय स्वीकारना काम आता है।
मन और निर्णय
राशि स्वामी शुक्र — शुक्र, मैत्री, 5/5। पैसे और काम के निर्णय आसानी से बनते हैं।
शरीर, स्वास्थ्य और संतान
नाड़ी मध्य — अन्त्य, योनि सर्प — व्याघ्र। इस स्तर पर अलग उपाय की ज़रूरत नहीं।
दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं
मृगशिरा: स्वामी मंगल, देवता सोम, प्रतीक मृगशीर्ष, देव गण, वृषभ/मिथुन राशि। विशाखा: स्वामी गुरु, देवता इंद्रग्नि, प्रतीक विजय तोरण, राक्षस गण, तुला/वृश्चिक राशि।
दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा
मृगशिरा नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में विशाखा 16वाँ स्थान पर है; मृगशिरा के लिए सबसे अधिक रोहिणी (35/36), सबसे कम चित्रा (9/36), 18 से ऊपर 16 नक्षत्र। विशाखा के 26 में मृगशिरा 18वाँ स्थान पर; विशाखा के लिए सबसे अधिक धनिष्ठा (30.5/36), सबसे कम रेवती (5.5/36), 18 से ऊपर 17।
नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ
मृगशिरा नक्षत्र को कन्या का मानकर 18.5/36। विशाखा को कन्या का मानें तो केवल वर्ण बदलकर 17.5/36। उस एक अंक के लिए अलग पृष्ठ नहीं — दोनों पाठ यहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मृगशिरा — विशाखा मिलान में कितने अंक हैं?+
36 में से 18.5 (51%) — स्वीकार्य मेल। यह पारंपरिक सीमा 18 से ऊपर है।
इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+
गण कूट — 0/6। सबसे अधिक नाड़ी कूट — 8/8।
मृगशिरा — विशाखा के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+
मृगशिरा नक्षत्र से विशाखा 12वाँ; विशाखा नक्षत्र से मृगशिरा 17वाँ। राशि के स्तर पर छठी — 8वीं।
क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+
नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।