मघा — विशाखा नक्षत्र मिलान

मघा नक्षत्र और विशाखा नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 17.5 अंक मिलते हैं (49%) — उपाय के साथ विचार योग्य। आठ में सबसे मज़बूत भकूट (राशि) कूट है। मघा नक्षत्र से विशाखा 7वाँ नक्षत्र है।

17.5

अंक / 36

उपाय के साथ विचार योग्य

प्रतिशत: 49%

विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36

क्या यह 17.5/36 आप पर भी लागू होता है?

यह पृष्ठ केवल मघा — विशाखा नक्षत्रों से गिना गया है। वश्य कूट यहाँ 0/2 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।

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दोनों नक्षत्रों का विवरण

मघाविशाखा
स्वामी ग्रहकेतुगुरु
राशिसिंहतुला/वृश्चिक
गणराक्षसराक्षस
योनिमूषकव्याघ्र
नाड़ीअन्त्यअन्त्य
तत्वअग्निवायु
देवतापितृ (पूर्वज)इंद्रग्नि
प्रतीकशाही सिंहासनविजय तोरण
राशि विस्तार120°00' – 133°20'200°00' – 213°20'

आठ कूट — अंकों का विवरण

अंक / 36मघाविशाखा
1/1वर्ण कूट
पूरे अंक
अग्निवायु
0/2वश्य कूट
शून्य अंक
सिंहतुला/वृश्चिक
1.5/3तारा (दिन) कूट
आंशिक
7वाँ22वाँ
2/4योनि कूट
आंशिक
मूषकव्याघ्र
0/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी)
शून्य अंक
सूर्यशुक्र
6/6गण कूट
एक ही गण
राक्षसराक्षस
7/7भकूट (राशि) कूट
पूरे अंक
तीसरी11वीं
0/8नाड़ी कूट
नाड़ी दोष
अन्त्यअन्त्य

अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान

अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।

रज्जुपाद·उदरहै

पाद — उदर, अलग रज्जु।

वेधरेवती·वेध नहींहै

मघा का वेध रेवती है; विशाखा नहीं।

महेंद्र22वाँ·4·7·10·13·16·19·22·25है

विशाखा नक्षत्र से मघा 22वाँ है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।

स्त्री-दीर्घ22वाँ·7 से अधिकहै

सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 22 है।

योनि लिंग (काणम्)स्त्री·स्त्रीनहीं

दोनों नक्षत्रों का लिंग एक ही है।

इस मेल को क्या तय करता है

स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन

दोनों राक्षस गण; राशि अंतर 3-11, भकूट दोष नहीं। रोज़मर्रा की समझ सहज।

मन और निर्णय

सूर्य — शुक्र शत्रु, 0/5। बड़े निर्णय पहले से तय कर लेना ज़रूरी।

शरीर, स्वास्थ्य और संतान

दोनों अन्त्य नाड़ी: नाड़ी दोष, आठ में सबसे भारी कूट। पूरी कुंडली मिलान और उपाय की सलाह चाहिए।

दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं

मघा: स्वामी केतु, देवता पितृ (पूर्वज), प्रतीक शाही सिंहासन, राक्षस गण, सिंह राशि। विशाखा: स्वामी गुरु, देवता इंद्रग्नि, प्रतीक विजय तोरण, राक्षस गण, तुला/वृश्चिक राशि।

दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा

मघा नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में विशाखा 16वाँ स्थान पर है; मघा के लिए सबसे अधिक ज्येष्ठा (31/36), सबसे कम श्रवण (4.5/36), 18 से ऊपर 14 नक्षत्र। विशाखा के 26 में मघा 20वाँ स्थान पर; विशाखा के लिए सबसे अधिक धनिष्ठा (30.5/36), सबसे कम रेवती (5.5/36), 18 से ऊपर 17।

नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ

मघा नक्षत्र को कन्या का मानकर 17.5/36। विशाखा को कन्या का मानें तो केवल वर्ण बदलकर 16.5/36। उस एक अंक के लिए अलग पृष्ठ नहीं — दोनों पाठ यहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मघा — विशाखा मिलान में कितने अंक हैं?+

36 में से 17.5 (49%) — उपाय के साथ विचार योग्य। यह पारंपरिक सीमा 18 तक नहीं पहुँचता।

इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+

वश्य कूट — 0/2। सबसे अधिक भकूट (राशि) कूट — 7/7।

मघा — विशाखा के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+

मघा नक्षत्र से विशाखा 7वाँ; विशाखा नक्षत्र से मघा 22वाँ। राशि के स्तर पर तीसरी — 11वीं।

क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+

नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।

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