ज्येष्ठा — मघा नक्षत्र मिलान
ज्येष्ठा नक्षत्र और मघा नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 32 अंक मिलते हैं (89%) — उत्तम मेल। आठ में सबसे मज़बूत नाड़ी कूट है। ज्येष्ठा नक्षत्र से मघा 20वाँ नक्षत्र है।
32
अंक / 36
प्रतिशत: 89%
विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36
क्या यह 32/36 आप पर भी लागू होता है?
यह पृष्ठ केवल ज्येष्ठा — मघा नक्षत्रों से गिना गया है। वश्य कूट यहाँ 0/2 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।
दोनों नक्षत्रों का विवरण
| ज्येष्ठा | मघा | |
|---|---|---|
| स्वामी ग्रह | बुध | केतु |
| राशि | वृश्चिक | सिंह |
| गण | राक्षस | राक्षस |
| योनि | मृग | मूषक |
| नाड़ी | आदि | अन्त्य |
| तत्व | जल | अग्नि |
| देवता | इंद्र | पितृ (पूर्वज) |
| प्रतीक | कुंडल या छाता | शाही सिंहासन |
| राशि विस्तार | 226°40' – 240°00' | 120°00' – 133°20' |
आठ कूट — अंकों का विवरण
| अंक / 36 | ज्येष्ठा | मघा |
|---|---|---|
1/1वर्ण कूट पूरे अंक | जल | अग्नि |
0/2वश्य कूट शून्य अंक | वृश्चिक | सिंह |
3/3तारा (दिन) कूट पूरे अंक | 20वाँ | 9वाँ |
2/4योनि कूट आंशिक | मृग | मूषक |
5/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी) पूरे अंक | मंगल | सूर्य |
6/6गण कूट एक ही गण | राक्षस | राक्षस |
7/7भकूट (राशि) कूट पूरे अंक | 10वीं | चौथी |
8/8नाड़ी कूट पूरे अंक | आदि | अन्त्य |
अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान
अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।
दोनों पाद रज्जु में — एक ही रज्जु, इसे सबसे गंभीरता से देखा जाता है।
ज्येष्ठा का वेध अश्विनी है; मघा नहीं।
मघा नक्षत्र से ज्येष्ठा 9वाँ है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।
सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 9 है।
दोनों नक्षत्रों का लिंग एक ही है।
इस मेल को क्या तय करता है
स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन
दोनों राक्षस गण; राशि अंतर 10-4, भकूट दोष नहीं। रोज़मर्रा की समझ सहज।
मन और निर्णय
राशि स्वामी मंगल — सूर्य, मैत्री, 5/5। पैसे और काम के निर्णय आसानी से बनते हैं।
शरीर, स्वास्थ्य और संतान
नाड़ी आदि — अन्त्य, योनि मृग — मूषक। इस स्तर पर अलग उपाय की ज़रूरत नहीं।
दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं
ज्येष्ठा: स्वामी बुध, देवता इंद्र, प्रतीक कुंडल या छाता, राक्षस गण, वृश्चिक राशि। मघा: स्वामी केतु, देवता पितृ (पूर्वज), प्रतीक शाही सिंहासन, राक्षस गण, सिंह राशि।
दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा
ज्येष्ठा नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में मघा पहला स्थान पर है; ज्येष्ठा के लिए सबसे अधिक मघा (32/36), सबसे कम आर्द्रा (4.5/36), 18 से ऊपर 17 नक्षत्र। मघा के 26 में ज्येष्ठा पहला स्थान पर; मघा के लिए सबसे अधिक ज्येष्ठा (31/36), सबसे कम श्रवण (4.5/36), 18 से ऊपर 14।
नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ
ज्येष्ठा नक्षत्र को कन्या का मानकर 32/36। मघा को कन्या का मानें तो केवल वर्ण बदलकर 31/36। उस एक अंक के लिए अलग पृष्ठ नहीं — दोनों पाठ यहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ज्येष्ठा — मघा मिलान में कितने अंक हैं?+
36 में से 32 (89%) — उत्तम मेल। यह पारंपरिक सीमा 18 से ऊपर है।
इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+
वश्य कूट — 0/2। सबसे अधिक नाड़ी कूट — 8/8।
ज्येष्ठा — मघा के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+
ज्येष्ठा नक्षत्र से मघा 20वाँ; मघा नक्षत्र से ज्येष्ठा 9वाँ। राशि के स्तर पर 10वीं — चौथी।
क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+
नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।