मघा — उत्तराषाढ़ा नक्षत्र मिलान
मघा नक्षत्र और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 10.5 अंक मिलते हैं (29%) — सावधानी आवश्यक। आठ में सबसे मज़बूत ग्रह मैत्री (राशि स्वामी) है। मघा नक्षत्र से उत्तराषाढ़ा 12वाँ नक्षत्र है।
10.5
अंक / 36
प्रतिशत: 29%
विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36
क्या यह 10.5/36 आप पर भी लागू होता है?
यह पृष्ठ केवल मघा — उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों से गिना गया है। वश्य कूट यहाँ 0/2 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।
दोनों नक्षत्रों का विवरण
| मघा | उत्तराषाढ़ा | |
|---|---|---|
| स्वामी ग्रह | केतु | सूर्य |
| राशि | सिंह | धनु/मकर |
| गण | राक्षस | मनुष्य |
| योनि | मूषक | नकुल |
| नाड़ी | अन्त्य | अन्त्य |
| तत्व | अग्नि | अग्नि |
| देवता | पितृ (पूर्वज) | विश्वेदेवा |
| प्रतीक | शाही सिंहासन | गजदंत |
| राशि विस्तार | 120°00' – 133°20' | 266°40' – 280°00' |
आठ कूट — अंकों का विवरण
| अंक / 36 | मघा | उत्तराषाढ़ा |
|---|---|---|
1/1वर्ण कूट पूरे अंक | अग्नि | अग्नि |
0/2वश्य कूट शून्य अंक | सिंह | धनु/मकर |
1.5/3तारा (दिन) कूट आंशिक | 12वाँ | 17वाँ |
2/4योनि कूट आंशिक | मूषक | नकुल |
5/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी) पूरे अंक | सूर्य | गुरु |
1/6गण कूट कम | राक्षस | मनुष्य |
0/7भकूट (राशि) कूट भकूट दोष | पाँचवीं | 9वीं |
0/8नाड़ी कूट नाड़ी दोष | अन्त्य | अन्त्य |
अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान
अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।
पाद — उदर, अलग रज्जु।
मघा का वेध रेवती है; उत्तराषाढ़ा नहीं।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र से मघा 17वाँ है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।
सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 17 है।
दोनों नक्षत्रों का लिंग एक ही है।
इस मेल को क्या तय करता है
स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन
राक्षस — मनुष्य गण, 1/6। अलग स्वभाव; बदलने के बजाय स्वीकारना काम आता है।
मन और निर्णय
राशि स्वामी सूर्य — गुरु, मैत्री, 5/5। पैसे और काम के निर्णय आसानी से बनते हैं।
शरीर, स्वास्थ्य और संतान
दोनों अन्त्य नाड़ी: नाड़ी दोष, आठ में सबसे भारी कूट। पूरी कुंडली मिलान और उपाय की सलाह चाहिए।
दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं
मघा: स्वामी केतु, देवता पितृ (पूर्वज), प्रतीक शाही सिंहासन, राक्षस गण, सिंह राशि। उत्तराषाढ़ा: स्वामी सूर्य, देवता विश्वेदेवा, प्रतीक गजदंत, मनुष्य गण, धनु/मकर राशि।
दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा
मघा नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में उत्तराषाढ़ा 24वाँ स्थान पर है; मघा के लिए सबसे अधिक ज्येष्ठा (31/36), सबसे कम श्रवण (4.5/36), 18 से ऊपर 14 नक्षत्र। उत्तराषाढ़ा के 26 में मघा 24वाँ स्थान पर; उत्तराषाढ़ा के लिए सबसे अधिक पूर्वाषाढ़ा (34/36), सबसे कम आश्लेषा (9.5/36), 18 से ऊपर 17।
नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ
मघा नक्षत्र को कन्या का मानकर गिना गया है। क्रम बदलने पर भी 10.5/36 वही — आठ में सात कूट क्रम नहीं देखते, वर्ण भी यहाँ नहीं बदलता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मघा — उत्तराषाढ़ा मिलान में कितने अंक हैं?+
36 में से 10.5 (29%) — सावधानी आवश्यक। यह पारंपरिक सीमा 18 तक नहीं पहुँचता।
इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+
वश्य कूट — 0/2। सबसे अधिक ग्रह मैत्री (राशि स्वामी) — 5/5।
मघा — उत्तराषाढ़ा के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+
मघा नक्षत्र से उत्तराषाढ़ा 12वाँ; उत्तराषाढ़ा नक्षत्र से मघा 17वाँ। राशि के स्तर पर पाँचवीं — 9वीं।
क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+
नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।