अश्विनी — उत्तराषाढ़ा नक्षत्र मिलान

अश्विनी नक्षत्र और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 23.5 अंक मिलते हैं (65%) — स्वीकार्य मेल। आठ में सबसे मज़बूत नाड़ी कूट है। अश्विनी नक्षत्र से उत्तराषाढ़ा 21वाँ नक्षत्र है।

23.5

अंक / 36

स्वीकार्य मेल

प्रतिशत: 65%

विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36

क्या यह 23.5/36 आप पर भी लागू होता है?

यह पृष्ठ केवल अश्विनी — उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों से गिना गया है। भकूट (राशि) कूट यहाँ 0/7 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।

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दोनों नक्षत्रों का विवरण

अश्विनीउत्तराषाढ़ा
स्वामी ग्रहकेतुसूर्य
राशिमेषधनु/मकर
गणदेवमनुष्य
योनिअश्वनकुल
नाड़ीआदिअन्त्य
तत्वअग्निअग्नि
देवताअश्विनी कुमारविश्वेदेवा
प्रतीकघोड़े का सिरगजदंत
राशि विस्तार0°00' – 13°20'266°40' – 280°00'

आठ कूट — अंकों का विवरण

अंक / 36अश्विनीउत्तराषाढ़ा
1/1वर्ण कूट
पूरे अंक
अग्निअग्नि
1/2वश्य कूट
आंशिक
मेषधनु/मकर
1.5/3तारा (दिन) कूट
आंशिक
21वाँ8वाँ
2/4योनि कूट
आंशिक
अश्वनकुल
5/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी)
पूरे अंक
मंगलगुरु
5/6गण कूट
आंशिक
देवमनुष्य
0/7भकूट (राशि) कूट
भकूट दोष
9वींपाँचवीं
8/8नाड़ी कूट
पूरे अंक
आदिअन्त्य

अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान

अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।

रज्जुपाद·उदरहै

पाद — उदर, अलग रज्जु।

वेधज्येष्ठा·वेध नहींहै

अश्विनी का वेध ज्येष्ठा है; उत्तराषाढ़ा नहीं।

महेंद्र8वाँ·4·7·10·13·16·19·22·25नहीं

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र से अश्विनी 8वाँ है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।

स्त्री-दीर्घ8वाँ·7 से अधिकहै

सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 8 है।

योनि लिंग (काणम्)पुरुष·स्त्रीहै

दोनों नक्षत्रों का लिंग अलग है — यह संयोग श्रेष्ठ माना जाता है।

इस मेल को क्या तय करता है

स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन

मेष — धनु/मकर, अंतर 9-5: भकूट दोष। पारिवारिक निर्णय बात करके तय करने होंगे।

मन और निर्णय

राशि स्वामी मंगल — गुरु, मैत्री, 5/5। पैसे और काम के निर्णय आसानी से बनते हैं।

शरीर, स्वास्थ्य और संतान

नाड़ी आदि — अन्त्य, योनि अश्व — नकुल। इस स्तर पर अलग उपाय की ज़रूरत नहीं।

दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं

अश्विनी: स्वामी केतु, देवता अश्विनी कुमार, प्रतीक घोड़े का सिर, देव गण, मेष राशि। उत्तराषाढ़ा: स्वामी सूर्य, देवता विश्वेदेवा, प्रतीक गजदंत, मनुष्य गण, धनु/मकर राशि।

दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा

अश्विनी नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में उत्तराषाढ़ा 12वाँ स्थान पर है; अश्विनी के लिए सबसे अधिक भरणी (33/36), सबसे कम मूल (9/36), 18 से ऊपर 19 नक्षत्र। उत्तराषाढ़ा के 26 में अश्विनी 11वाँ स्थान पर; उत्तराषाढ़ा के लिए सबसे अधिक पूर्वाषाढ़ा (34/36), सबसे कम आश्लेषा (9.5/36), 18 से ऊपर 17।

नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ

अश्विनी नक्षत्र को कन्या का मानकर गिना गया है। क्रम बदलने पर भी 23.5/36 वही — आठ में सात कूट क्रम नहीं देखते, वर्ण भी यहाँ नहीं बदलता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अश्विनी — उत्तराषाढ़ा मिलान में कितने अंक हैं?+

36 में से 23.5 (65%) — स्वीकार्य मेल। यह पारंपरिक सीमा 18 से ऊपर है।

इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+

भकूट (राशि) कूट — 0/7। सबसे अधिक नाड़ी कूट — 8/8।

अश्विनी — उत्तराषाढ़ा के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+

अश्विनी नक्षत्र से उत्तराषाढ़ा 21वाँ; उत्तराषाढ़ा नक्षत्र से अश्विनी 8वाँ। राशि के स्तर पर 9वीं — पाँचवीं।

क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+

नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।

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