अश्विनी — रेवती नक्षत्र मिलान

अश्विनी नक्षत्र और रेवती नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 24 अंक मिलते हैं (67%) — बहुत अच्छा मेल। आठ में सबसे मज़बूत नाड़ी कूट है। अश्विनी नक्षत्र से रेवती 27वाँ नक्षत्र है।

24

अंक / 36

बहुत अच्छा मेल

प्रतिशत: 67%

विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36

क्या यह 24/36 आप पर भी लागू होता है?

यह पृष्ठ केवल अश्विनी — रेवती नक्षत्रों से गिना गया है। वर्ण कूट यहाँ 0/1 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।

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दोनों नक्षत्रों का विवरण

अश्विनीरेवती
स्वामी ग्रहकेतुबुध
राशिमेषमीन
गणदेवदेव
योनिअश्वगज
नाड़ीआदिअन्त्य
तत्वअग्निजल
देवताअश्विनी कुमारपूषन
प्रतीकघोड़े का सिरमछली / मृदंग
राशि विस्तार0°00' – 13°20'346°40' – 360°00'

आठ कूट — अंकों का विवरण

अंक / 36अश्विनीरेवती
0/1वर्ण कूट
शून्य अंक
अग्निजल
0/2वश्य कूट
शून्य अंक
मेषमीन
3/3तारा (दिन) कूट
पूरे अंक
27वाँदूसरा
2/4योनि कूट
आंशिक
अश्वगज
5/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी)
पूरे अंक
मंगलगुरु
6/6गण कूट
एक ही गण
देवदेव
0/7भकूट (राशि) कूट
भकूट दोष
12वींदूसरी
8/8नाड़ी कूट
पूरे अंक
आदिअन्त्य

अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान

अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।

रज्जुपाद·पादनहीं

दोनों पाद रज्जु में — एक ही रज्जु, इसे सबसे गंभीरता से देखा जाता है।

वेधज्येष्ठा·वेध नहींहै

अश्विनी का वेध ज्येष्ठा है; रेवती नहीं।

महेंद्रदूसरा·4·7·10·13·16·19·22·25नहीं

रेवती नक्षत्र से अश्विनी दूसरा है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।

स्त्री-दीर्घदूसरा·7 से अधिकनहीं

सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 2 है।

योनि लिंग (काणम्)पुरुष·स्त्रीहै

दोनों नक्षत्रों का लिंग अलग है — यह संयोग श्रेष्ठ माना जाता है।

इस मेल को क्या तय करता है

स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन

मेष — मीन, अंतर 12-2: भकूट दोष। पारिवारिक निर्णय बात करके तय करने होंगे।

मन और निर्णय

राशि स्वामी मंगल — गुरु, मैत्री, 5/5। पैसे और काम के निर्णय आसानी से बनते हैं।

शरीर, स्वास्थ्य और संतान

नाड़ी आदि — अन्त्य, योनि अश्व — गज। इस स्तर पर अलग उपाय की ज़रूरत नहीं।

दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं

अश्विनी: स्वामी केतु, देवता अश्विनी कुमार, प्रतीक घोड़े का सिर, देव गण, मेष राशि। रेवती: स्वामी बुध, देवता पूषन, प्रतीक मछली / मृदंग, देव गण, मीन राशि।

दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा

अश्विनी नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में रेवती 9वाँ स्थान पर है; अश्विनी के लिए सबसे अधिक भरणी (33/36), सबसे कम मूल (9/36), 18 से ऊपर 19 नक्षत्र। रेवती के 26 में अश्विनी 10वाँ स्थान पर; रेवती के लिए सबसे अधिक उत्तर भाद्रपद (33/36), सबसे कम विशाखा (6.5/36), 18 से ऊपर 18।

नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ

अश्विनी नक्षत्र को कन्या का मानकर 24/36। रेवती को कन्या का मानें तो केवल वर्ण बदलकर 25/36। उस एक अंक के लिए अलग पृष्ठ नहीं — दोनों पाठ यहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अश्विनी — रेवती मिलान में कितने अंक हैं?+

36 में से 24 (67%) — बहुत अच्छा मेल। यह पारंपरिक सीमा 18 से ऊपर है।

इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+

वर्ण कूट — 0/1। सबसे अधिक नाड़ी कूट — 8/8।

अश्विनी — रेवती के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+

अश्विनी नक्षत्र से रेवती 27वाँ; रेवती नक्षत्र से अश्विनी दूसरा। राशि के स्तर पर 12वीं — दूसरी।

क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+

नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।

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