आश्लेषा — रेवती नक्षत्र मिलान

आश्लेषा नक्षत्र और रेवती नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 9 अंक मिलते हैं (25%) — सावधानी आवश्यक। आठ में सबसे मज़बूत वश्य कूट है। आश्लेषा नक्षत्र से रेवती 19वाँ नक्षत्र है।

9

अंक / 36

सावधानी आवश्यक

प्रतिशत: 25%

विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36

क्या यह 9/36 आप पर भी लागू होता है?

यह पृष्ठ केवल आश्लेषा — रेवती नक्षत्रों से गिना गया है। तारा (दिन) कूट यहाँ 0/3 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।

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दोनों नक्षत्रों का विवरण

आश्लेषारेवती
स्वामी ग्रहबुधबुध
राशिकर्कमीन
गणराक्षसदेव
योनिमार्जारगज
नाड़ीअन्त्यअन्त्य
तत्वजलजल
देवतासर्प (साँप)पूषन
प्रतीकसर्पमछली / मृदंग
राशि विस्तार106°40' – 120°00'346°40' – 360°00'

आठ कूट — अंकों का विवरण

अंक / 36आश्लेषारेवती
1/1वर्ण कूट
पूरे अंक
जलजल
2/2वश्य कूट
पूरे अंक
कर्कमीन
0/3तारा (दिन) कूट
शून्य अंक
19वाँ10वाँ
2/4योनि कूट
आंशिक
मार्जारगज
4/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी)
आंशिक
चंद्रमागुरु
0/6गण कूट
शून्य अंक
राक्षसदेव
0/7भकूट (राशि) कूट
भकूट दोष
9वींपाँचवीं
0/8नाड़ी कूट
नाड़ी दोष
अन्त्यअन्त्य

अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान

अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।

रज्जुपाद·पादनहीं

दोनों पाद रज्जु में — एक ही रज्जु, इसे सबसे गंभीरता से देखा जाता है।

वेधमूल·वेध नहींहै

आश्लेषा का वेध मूल है; रेवती नहीं।

महेंद्र10वाँ·4·7·10·13·16·19·22·25है

रेवती नक्षत्र से आश्लेषा 10वाँ है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।

स्त्री-दीर्घ10वाँ·7 से अधिकहै

सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 10 है।

योनि लिंग (काणम्)स्त्री·स्त्रीनहीं

दोनों नक्षत्रों का लिंग एक ही है।

इस मेल को क्या तय करता है

स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन

राक्षस — देव गण, 0/6। अलग स्वभाव; बदलने के बजाय स्वीकारना काम आता है।

मन और निर्णय

राशि स्वामी चंद्रमा — गुरु, मैत्री, 4/5। पैसे और काम के निर्णय आसानी से बनते हैं।

शरीर, स्वास्थ्य और संतान

दोनों अन्त्य नाड़ी: नाड़ी दोष, आठ में सबसे भारी कूट। पूरी कुंडली मिलान और उपाय की सलाह चाहिए।

दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं

आश्लेषा: स्वामी बुध, देवता सर्प (साँप), प्रतीक सर्प, राक्षस गण, कर्क राशि। रेवती: स्वामी बुध, देवता पूषन, प्रतीक मछली / मृदंग, देव गण, मीन राशि।

दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा

आश्लेषा नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में रेवती 26वाँ स्थान पर है; आश्लेषा के लिए सबसे अधिक चित्रा (29.5/36), सबसे कम रेवती (9/36), 18 से ऊपर 17 नक्षत्र। रेवती के 26 में आश्लेषा 25वाँ स्थान पर; रेवती के लिए सबसे अधिक उत्तर भाद्रपद (33/36), सबसे कम विशाखा (6.5/36), 18 से ऊपर 18।

नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ

आश्लेषा नक्षत्र को कन्या का मानकर गिना गया है। क्रम बदलने पर भी 9/36 वही — आठ में सात कूट क्रम नहीं देखते, वर्ण भी यहाँ नहीं बदलता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आश्लेषा — रेवती मिलान में कितने अंक हैं?+

36 में से 9 (25%) — सावधानी आवश्यक। यह पारंपरिक सीमा 18 तक नहीं पहुँचता।

इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+

तारा (दिन) कूट — 0/3। सबसे अधिक वश्य कूट — 2/2।

आश्लेषा — रेवती के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+

आश्लेषा नक्षत्र से रेवती 19वाँ; रेवती नक्षत्र से आश्लेषा 10वाँ। राशि के स्तर पर 9वीं — पाँचवीं।

क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+

नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।

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