आश्लेषा — कृत्तिका नक्षत्र मिलान

आश्लेषा नक्षत्र और कृत्तिका नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 21.5 अंक मिलते हैं (60%) — स्वीकार्य मेल। आठ में सबसे मज़बूत भकूट (राशि) कूट है। आश्लेषा नक्षत्र से कृत्तिका 22वाँ नक्षत्र है।

21.5

अंक / 36

स्वीकार्य मेल

प्रतिशत: 60%

विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36

क्या यह 21.5/36 आप पर भी लागू होता है?

यह पृष्ठ केवल आश्लेषा — कृत्तिका नक्षत्रों से गिना गया है। वश्य कूट यहाँ 0/2 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।

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दोनों नक्षत्रों का विवरण

आश्लेषाकृत्तिका
स्वामी ग्रहबुधसूर्य
राशिकर्कमेष/वृषभ
गणराक्षसराक्षस
योनिमार्जारमेष
नाड़ीअन्त्यअन्त्य
तत्वजलअग्नि
देवतासर्प (साँप)अग्नि
प्रतीकसर्पउस्तरा/लौ
राशि विस्तार106°40' – 120°00'26°40' – 40°00'

आठ कूट — अंकों का विवरण

अंक / 36आश्लेषाकृत्तिका
1/1वर्ण कूट
पूरे अंक
जलअग्नि
0/2वश्य कूट
शून्य अंक
कर्कमेष/वृषभ
1.5/3तारा (दिन) कूट
आंशिक
22वाँ7वाँ
2/4योनि कूट
आंशिक
मार्जारमेष
4/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी)
आंशिक
चंद्रमामंगल
6/6गण कूट
एक ही गण
राक्षसराक्षस
7/7भकूट (राशि) कूट
पूरे अंक
10वींचौथी
0/8नाड़ी कूट
नाड़ी दोष
अन्त्यअन्त्य

अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान

अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।

रज्जुपाद·उदरहै

पाद — उदर, अलग रज्जु।

वेधमूल·वेध नहींहै

आश्लेषा का वेध मूल है; कृत्तिका नहीं।

महेंद्र7वाँ·4·7·10·13·16·19·22·25है

कृत्तिका नक्षत्र से आश्लेषा 7वाँ है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।

स्त्री-दीर्घ7वाँ·7 से अधिकहै

सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 7 है।

योनि लिंग (काणम्)स्त्री·स्त्रीनहीं

दोनों नक्षत्रों का लिंग एक ही है।

इस मेल को क्या तय करता है

स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन

दोनों राक्षस गण; राशि अंतर 10-4, भकूट दोष नहीं। रोज़मर्रा की समझ सहज।

मन और निर्णय

राशि स्वामी चंद्रमा — मंगल, मैत्री, 4/5। पैसे और काम के निर्णय आसानी से बनते हैं।

शरीर, स्वास्थ्य और संतान

दोनों अन्त्य नाड़ी: नाड़ी दोष, आठ में सबसे भारी कूट। पूरी कुंडली मिलान और उपाय की सलाह चाहिए।

दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं

आश्लेषा: स्वामी बुध, देवता सर्प (साँप), प्रतीक सर्प, राक्षस गण, कर्क राशि। कृत्तिका: स्वामी सूर्य, देवता अग्नि, प्रतीक उस्तरा/लौ, राक्षस गण, मेष/वृषभ राशि।

दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा

आश्लेषा नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में कृत्तिका 8वाँ स्थान पर है; आश्लेषा के लिए सबसे अधिक चित्रा (29.5/36), सबसे कम रेवती (9/36), 18 से ऊपर 17 नक्षत्र। कृत्तिका के 26 में आश्लेषा 12वाँ स्थान पर; कृत्तिका के लिए सबसे अधिक भरणी (29/36), सबसे कम रेवती (8.5/36), 18 से ऊपर 15।

नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ

आश्लेषा नक्षत्र को कन्या का मानकर 21.5/36। कृत्तिका को कन्या का मानें तो केवल वर्ण बदलकर 20.5/36। उस एक अंक के लिए अलग पृष्ठ नहीं — दोनों पाठ यहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आश्लेषा — कृत्तिका मिलान में कितने अंक हैं?+

36 में से 21.5 (60%) — स्वीकार्य मेल। यह पारंपरिक सीमा 18 से ऊपर है।

इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+

वश्य कूट — 0/2। सबसे अधिक भकूट (राशि) कूट — 7/7।

आश्लेषा — कृत्तिका के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+

आश्लेषा नक्षत्र से कृत्तिका 22वाँ; कृत्तिका नक्षत्र से आश्लेषा 7वाँ। राशि के स्तर पर 10वीं — चौथी।

क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+

नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।

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