आश्लेषा — रोहिणी नक्षत्र मिलान
आश्लेषा नक्षत्र और रोहिणी नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 13.5 अंक मिलते हैं (38%) — उपाय के साथ विचार योग्य। आठ में सबसे मज़बूत भकूट (राशि) कूट है। आश्लेषा नक्षत्र से रोहिणी 23वाँ नक्षत्र है।
13.5
अंक / 36
प्रतिशत: 38%
विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36
क्या यह 13.5/36 आप पर भी लागू होता है?
यह पृष्ठ केवल आश्लेषा — रोहिणी नक्षत्रों से गिना गया है। वश्य कूट यहाँ 0/2 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।
दोनों नक्षत्रों का विवरण
| आश्लेषा | रोहिणी | |
|---|---|---|
| स्वामी ग्रह | बुध | चंद्रमा |
| राशि | कर्क | वृषभ |
| गण | राक्षस | मनुष्य |
| योनि | मार्जार | सर्प |
| नाड़ी | अन्त्य | अन्त्य |
| तत्व | जल | पृथ्वी |
| देवता | सर्प (साँप) | ब्रह्मा |
| प्रतीक | सर्प | रथ |
| राशि विस्तार | 106°40' – 120°00' | 40°00' – 53°20' |
आठ कूट — अंकों का विवरण
| अंक / 36 | आश्लेषा | रोहिणी |
|---|---|---|
1/1वर्ण कूट पूरे अंक | जल | पृथ्वी |
0/2वश्य कूट शून्य अंक | कर्क | वृषभ |
1.5/3तारा (दिन) कूट आंशिक | 23वाँ | छठा |
2/4योनि कूट आंशिक | मार्जार | सर्प |
1/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी) कम | चंद्रमा | शुक्र |
1/6गण कूट कम | राक्षस | मनुष्य |
7/7भकूट (राशि) कूट पूरे अंक | 11वीं | तीसरी |
0/8नाड़ी कूट नाड़ी दोष | अन्त्य | अन्त्य |
अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान
अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।
पाद — कंठ, अलग रज्जु।
आश्लेषा का वेध मूल है; रोहिणी नहीं।
रोहिणी नक्षत्र से आश्लेषा छठा है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।
सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 6 है।
दोनों नक्षत्रों का लिंग एक ही है।
इस मेल को क्या तय करता है
स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन
राक्षस — मनुष्य गण, 1/6। अलग स्वभाव; बदलने के बजाय स्वीकारना काम आता है।
मन और निर्णय
चंद्रमा — शुक्र शत्रु, 1/5। बड़े निर्णय पहले से तय कर लेना ज़रूरी।
शरीर, स्वास्थ्य और संतान
दोनों अन्त्य नाड़ी: नाड़ी दोष, आठ में सबसे भारी कूट। पूरी कुंडली मिलान और उपाय की सलाह चाहिए।
दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं
आश्लेषा: स्वामी बुध, देवता सर्प (साँप), प्रतीक सर्प, राक्षस गण, कर्क राशि। रोहिणी: स्वामी चंद्रमा, देवता ब्रह्मा, प्रतीक रथ, मनुष्य गण, वृषभ राशि।
दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा
आश्लेषा नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में रोहिणी 22वाँ स्थान पर है; आश्लेषा के लिए सबसे अधिक चित्रा (29.5/36), सबसे कम रेवती (9/36), 18 से ऊपर 17 नक्षत्र। रोहिणी के 26 में आश्लेषा 22वाँ स्थान पर; रोहिणी के लिए सबसे अधिक मृगशिरा (35/36), सबसे कम उत्तराषाढ़ा (11/36), 18 से ऊपर 17।
नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ
आश्लेषा नक्षत्र को कन्या का मानकर 13.5/36। रोहिणी को कन्या का मानें तो केवल वर्ण बदलकर 12.5/36। उस एक अंक के लिए अलग पृष्ठ नहीं — दोनों पाठ यहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आश्लेषा — रोहिणी मिलान में कितने अंक हैं?+
36 में से 13.5 (38%) — उपाय के साथ विचार योग्य। यह पारंपरिक सीमा 18 तक नहीं पहुँचता।
इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+
वश्य कूट — 0/2। सबसे अधिक भकूट (राशि) कूट — 7/7।
आश्लेषा — रोहिणी के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+
आश्लेषा नक्षत्र से रोहिणी 23वाँ; रोहिणी नक्षत्र से आश्लेषा छठा। राशि के स्तर पर 11वीं — तीसरी।
क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+
नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।