आश्लेषा — मघा नक्षत्र मिलान
आश्लेषा नक्षत्र और मघा नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 15 अंक मिलते हैं (42%) — उपाय के साथ विचार योग्य। आठ में सबसे मज़बूत गण कूट है। आश्लेषा नक्षत्र से मघा दूसरा नक्षत्र है।
15
अंक / 36
प्रतिशत: 42%
विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36
क्या यह 15/36 आप पर भी लागू होता है?
यह पृष्ठ केवल आश्लेषा — मघा नक्षत्रों से गिना गया है। वश्य कूट यहाँ 0/2 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।
दोनों नक्षत्रों का विवरण
| आश्लेषा | मघा | |
|---|---|---|
| स्वामी ग्रह | बुध | केतु |
| राशि | कर्क | सिंह |
| गण | राक्षस | राक्षस |
| योनि | मार्जार | मूषक |
| नाड़ी | अन्त्य | अन्त्य |
| तत्व | जल | अग्नि |
| देवता | सर्प (साँप) | पितृ (पूर्वज) |
| प्रतीक | सर्प | शाही सिंहासन |
| राशि विस्तार | 106°40' – 120°00' | 120°00' – 133°20' |
आठ कूट — अंकों का विवरण
| अंक / 36 | आश्लेषा | मघा |
|---|---|---|
1/1वर्ण कूट पूरे अंक | जल | अग्नि |
0/2वश्य कूट शून्य अंक | कर्क | सिंह |
3/3तारा (दिन) कूट पूरे अंक | दूसरा | 27वाँ |
0/4योनि कूट शत्रु योनि | मार्जार | मूषक |
5/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी) पूरे अंक | चंद्रमा | सूर्य |
6/6गण कूट एक ही गण | राक्षस | राक्षस |
0/7भकूट (राशि) कूट भकूट दोष | दूसरी | 12वीं |
0/8नाड़ी कूट नाड़ी दोष | अन्त्य | अन्त्य |
अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान
अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।
दोनों पाद रज्जु में — एक ही रज्जु, इसे सबसे गंभीरता से देखा जाता है।
आश्लेषा का वेध मूल है; मघा नहीं।
मघा नक्षत्र से आश्लेषा 27वाँ है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।
सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 27 है।
दोनों नक्षत्रों का लिंग एक ही है।
इस मेल को क्या तय करता है
स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन
कर्क — सिंह, अंतर 2-12: भकूट दोष। पारिवारिक निर्णय बात करके तय करने होंगे।
मन और निर्णय
राशि स्वामी चंद्रमा — सूर्य, मैत्री, 5/5। पैसे और काम के निर्णय आसानी से बनते हैं।
शरीर, स्वास्थ्य और संतान
दोनों अन्त्य नाड़ी: नाड़ी दोष, आठ में सबसे भारी कूट। पूरी कुंडली मिलान और उपाय की सलाह चाहिए।
दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं
आश्लेषा: स्वामी बुध, देवता सर्प (साँप), प्रतीक सर्प, राक्षस गण, कर्क राशि। मघा: स्वामी केतु, देवता पितृ (पूर्वज), प्रतीक शाही सिंहासन, राक्षस गण, सिंह राशि।
दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा
आश्लेषा नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में मघा 21वाँ स्थान पर है; आश्लेषा के लिए सबसे अधिक चित्रा (29.5/36), सबसे कम रेवती (9/36), 18 से ऊपर 17 नक्षत्र। मघा के 26 में आश्लेषा 21वाँ स्थान पर; मघा के लिए सबसे अधिक ज्येष्ठा (31/36), सबसे कम श्रवण (4.5/36), 18 से ऊपर 14।
नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ
आश्लेषा नक्षत्र को कन्या का मानकर 15/36। मघा को कन्या का मानें तो केवल वर्ण बदलकर 14/36। उस एक अंक के लिए अलग पृष्ठ नहीं — दोनों पाठ यहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आश्लेषा — मघा मिलान में कितने अंक हैं?+
36 में से 15 (42%) — उपाय के साथ विचार योग्य। यह पारंपरिक सीमा 18 तक नहीं पहुँचता।
इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+
वश्य कूट — 0/2। सबसे अधिक गण कूट — 6/6।
आश्लेषा — मघा के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+
आश्लेषा नक्षत्र से मघा दूसरा; मघा नक्षत्र से आश्लेषा 27वाँ। राशि के स्तर पर दूसरी — 12वीं।
क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+
नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।