अश्विनी — मघा नक्षत्र मिलान
अश्विनी नक्षत्र और मघा नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 16 अंक मिलते हैं (44%) — उपाय के साथ विचार योग्य। आठ में सबसे मज़बूत नाड़ी कूट है। अश्विनी नक्षत्र से मघा 10वाँ नक्षत्र है।
16
अंक / 36
प्रतिशत: 44%
विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36
क्या यह 16/36 आप पर भी लागू होता है?
यह पृष्ठ केवल अश्विनी — मघा नक्षत्रों से गिना गया है। वश्य कूट यहाँ 0/2 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।
दोनों नक्षत्रों का विवरण
| अश्विनी | मघा | |
|---|---|---|
| स्वामी ग्रह | केतु | केतु |
| राशि | मेष | सिंह |
| गण | देव | राक्षस |
| योनि | अश्व | मूषक |
| नाड़ी | आदि | अन्त्य |
| तत्व | अग्नि | अग्नि |
| देवता | अश्विनी कुमार | पितृ (पूर्वज) |
| प्रतीक | घोड़े का सिर | शाही सिंहासन |
| राशि विस्तार | 0°00' – 13°20' | 120°00' – 133°20' |
आठ कूट — अंकों का विवरण
| अंक / 36 | अश्विनी | मघा |
|---|---|---|
1/1वर्ण कूट पूरे अंक | अग्नि | अग्नि |
0/2वश्य कूट शून्य अंक | मेष | सिंह |
0/3तारा (दिन) कूट शून्य अंक | 10वाँ | 19वाँ |
2/4योनि कूट आंशिक | अश्व | मूषक |
5/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी) पूरे अंक | मंगल | सूर्य |
0/6गण कूट शून्य अंक | देव | राक्षस |
0/7भकूट (राशि) कूट भकूट दोष | पाँचवीं | 9वीं |
8/8नाड़ी कूट पूरे अंक | आदि | अन्त्य |
अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान
अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।
दोनों पाद रज्जु में — एक ही रज्जु, इसे सबसे गंभीरता से देखा जाता है।
अश्विनी का वेध ज्येष्ठा है; मघा नहीं।
मघा नक्षत्र से अश्विनी 19वाँ है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।
सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 19 है।
दोनों नक्षत्रों का लिंग अलग है — यह संयोग श्रेष्ठ माना जाता है।
इस मेल को क्या तय करता है
स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन
देव — राक्षस गण, 0/6। अलग स्वभाव; बदलने के बजाय स्वीकारना काम आता है।
मन और निर्णय
राशि स्वामी मंगल — सूर्य, मैत्री, 5/5। पैसे और काम के निर्णय आसानी से बनते हैं।
शरीर, स्वास्थ्य और संतान
नाड़ी आदि — अन्त्य, योनि अश्व — मूषक। इस स्तर पर अलग उपाय की ज़रूरत नहीं।
दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं
अश्विनी: स्वामी केतु, देवता अश्विनी कुमार, प्रतीक घोड़े का सिर, देव गण, मेष राशि। मघा: स्वामी केतु, देवता पितृ (पूर्वज), प्रतीक शाही सिंहासन, राक्षस गण, सिंह राशि।
दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा
अश्विनी नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में मघा 20वाँ स्थान पर है; अश्विनी के लिए सबसे अधिक भरणी (33/36), सबसे कम मूल (9/36), 18 से ऊपर 19 नक्षत्र। मघा के 26 में अश्विनी 19वाँ स्थान पर; मघा के लिए सबसे अधिक ज्येष्ठा (31/36), सबसे कम श्रवण (4.5/36), 18 से ऊपर 14।
नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ
अश्विनी नक्षत्र को कन्या का मानकर गिना गया है। क्रम बदलने पर भी 16/36 वही — आठ में सात कूट क्रम नहीं देखते, वर्ण भी यहाँ नहीं बदलता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अश्विनी — मघा मिलान में कितने अंक हैं?+
36 में से 16 (44%) — उपाय के साथ विचार योग्य। यह पारंपरिक सीमा 18 तक नहीं पहुँचता।
इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+
वश्य कूट — 0/2। सबसे अधिक नाड़ी कूट — 8/8।
अश्विनी — मघा के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+
अश्विनी नक्षत्र से मघा 10वाँ; मघा नक्षत्र से अश्विनी 19वाँ। राशि के स्तर पर पाँचवीं — 9वीं।
क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+
नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।