मघा — मृगशिरा नक्षत्र मिलान

मघा नक्षत्र और मृगशिरा नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 19.5 अंक मिलते हैं (54%) — स्वीकार्य मेल। आठ में सबसे मज़बूत नाड़ी कूट है। मघा नक्षत्र से मृगशिरा 23वाँ नक्षत्र है।

19.5

अंक / 36

स्वीकार्य मेल

प्रतिशत: 54%

विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36

क्या यह 19.5/36 आप पर भी लागू होता है?

यह पृष्ठ केवल मघा — मृगशिरा नक्षत्रों से गिना गया है। वश्य कूट यहाँ 0/2 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।

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दोनों नक्षत्रों का विवरण

मघामृगशिरा
स्वामी ग्रहकेतुमंगल
राशिसिंहवृषभ/मिथुन
गणराक्षसदेव
योनिमूषकसर्प
नाड़ीअन्त्यमध्य
तत्वअग्निपृथ्वी
देवतापितृ (पूर्वज)सोम
प्रतीकशाही सिंहासनमृगशीर्ष
राशि विस्तार120°00' – 133°20'53°20' – 66°40'

आठ कूट — अंकों का विवरण

अंक / 36मघामृगशिरा
1/1वर्ण कूट
पूरे अंक
अग्निपृथ्वी
0/2वश्य कूट
शून्य अंक
सिंहवृषभ/मिथुन
1.5/3तारा (दिन) कूट
आंशिक
23वाँछठा
2/4योनि कूट
आंशिक
मूषकसर्प
0/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी)
शून्य अंक
सूर्यशुक्र
0/6गण कूट
शून्य अंक
राक्षसदेव
7/7भकूट (राशि) कूट
पूरे अंक
10वींचौथी
8/8नाड़ी कूट
पूरे अंक
अन्त्यमध्य

अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान

अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।

रज्जुपाद·शिरोहै

पाद — शिरो, अलग रज्जु।

वेधरेवती·वेध नहींहै

मघा का वेध रेवती है; मृगशिरा नहीं।

महेंद्रछठा·4·7·10·13·16·19·22·25नहीं

मृगशिरा नक्षत्र से मघा छठा है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।

स्त्री-दीर्घछठा·7 से अधिकनहीं

सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 6 है।

योनि लिंग (काणम्)स्त्री·पुरुषहै

दोनों नक्षत्रों का लिंग अलग है — यह संयोग श्रेष्ठ माना जाता है।

इस मेल को क्या तय करता है

स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन

राक्षस — देव गण, 0/6। अलग स्वभाव; बदलने के बजाय स्वीकारना काम आता है।

मन और निर्णय

सूर्य — शुक्र शत्रु, 0/5। बड़े निर्णय पहले से तय कर लेना ज़रूरी।

शरीर, स्वास्थ्य और संतान

नाड़ी अन्त्य — मध्य, योनि मूषक — सर्प। इस स्तर पर अलग उपाय की ज़रूरत नहीं।

दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं

मघा: स्वामी केतु, देवता पितृ (पूर्वज), प्रतीक शाही सिंहासन, राक्षस गण, सिंह राशि। मृगशिरा: स्वामी मंगल, देवता सोम, प्रतीक मृगशीर्ष, देव गण, वृषभ/मिथुन राशि।

दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा

मघा नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में मृगशिरा 13वाँ स्थान पर है; मघा के लिए सबसे अधिक ज्येष्ठा (31/36), सबसे कम श्रवण (4.5/36), 18 से ऊपर 14 नक्षत्र। मृगशिरा के 26 में मघा 15वाँ स्थान पर; मृगशिरा के लिए सबसे अधिक रोहिणी (35/36), सबसे कम चित्रा (9/36), 18 से ऊपर 16।

नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ

मघा नक्षत्र को कन्या का मानकर 19.5/36। मृगशिरा को कन्या का मानें तो केवल वर्ण बदलकर 18.5/36। उस एक अंक के लिए अलग पृष्ठ नहीं — दोनों पाठ यहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मघा — मृगशिरा मिलान में कितने अंक हैं?+

36 में से 19.5 (54%) — स्वीकार्य मेल। यह पारंपरिक सीमा 18 से ऊपर है।

इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+

वश्य कूट — 0/2। सबसे अधिक नाड़ी कूट — 8/8।

मघा — मृगशिरा के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+

मघा नक्षत्र से मृगशिरा 23वाँ; मृगशिरा नक्षत्र से मघा छठा। राशि के स्तर पर 10वीं — चौथी।

क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+

नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।

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