अश्विनी — पुष्य नक्षत्र मिलान
अश्विनी नक्षत्र और पुष्य नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 28.5 अंक मिलते हैं (79%) — उत्तम मेल। आठ में सबसे मज़बूत नाड़ी कूट है। अश्विनी नक्षत्र से पुष्य 8वाँ नक्षत्र है।
28.5
अंक / 36
प्रतिशत: 79%
विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36
क्या यह 28.5/36 आप पर भी लागू होता है?
यह पृष्ठ केवल अश्विनी — पुष्य नक्षत्रों से गिना गया है। वर्ण कूट यहाँ 0/1 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।
दोनों नक्षत्रों का विवरण
| अश्विनी | पुष्य | |
|---|---|---|
| स्वामी ग्रह | केतु | शनि |
| राशि | मेष | कर्क |
| गण | देव | देव |
| योनि | अश्व | मेष |
| नाड़ी | आदि | मध्य |
| तत्व | अग्नि | जल |
| देवता | अश्विनी कुमार | बृहस्पति |
| प्रतीक | घोड़े का सिर | पुष्प/थन |
| राशि विस्तार | 0°00' – 13°20' | 93°20' – 106°40' |
आठ कूट — अंकों का विवरण
| अंक / 36 | अश्विनी | पुष्य |
|---|---|---|
0/1वर्ण कूट शून्य अंक | अग्नि | जल |
0/2वश्य कूट शून्य अंक | मेष | कर्क |
1.5/3तारा (दिन) कूट आंशिक | 8वाँ | 21वाँ |
2/4योनि कूट आंशिक | अश्व | मेष |
4/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी) आंशिक | मंगल | चंद्रमा |
6/6गण कूट एक ही गण | देव | देव |
7/7भकूट (राशि) कूट पूरे अंक | चौथी | 10वीं |
8/8नाड़ी कूट पूरे अंक | आदि | मध्य |
अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान
अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।
पाद — ऊरु, अलग रज्जु।
अश्विनी का वेध ज्येष्ठा है; पुष्य नहीं।
पुष्य नक्षत्र से अश्विनी 21वाँ है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।
सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 21 है।
दोनों नक्षत्रों का लिंग एक ही है।
इस मेल को क्या तय करता है
स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन
दोनों देव गण; राशि अंतर 4-10, भकूट दोष नहीं। रोज़मर्रा की समझ सहज।
मन और निर्णय
राशि स्वामी मंगल — चंद्रमा, मैत्री, 4/5। पैसे और काम के निर्णय आसानी से बनते हैं।
शरीर, स्वास्थ्य और संतान
नाड़ी आदि — मध्य, योनि अश्व — मेष। इस स्तर पर अलग उपाय की ज़रूरत नहीं।
दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं
अश्विनी: स्वामी केतु, देवता अश्विनी कुमार, प्रतीक घोड़े का सिर, देव गण, मेष राशि। पुष्य: स्वामी शनि, देवता बृहस्पति, प्रतीक पुष्प/थन, देव गण, कर्क राशि।
दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा
अश्विनी नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में पुष्य दूसरा स्थान पर है; अश्विनी के लिए सबसे अधिक भरणी (33/36), सबसे कम मूल (9/36), 18 से ऊपर 19 नक्षत्र। पुष्य के 26 में अश्विनी पहला स्थान पर; पुष्य के लिए सबसे अधिक अश्विनी (29.5/36), सबसे कम पूर्वाषाढ़ा (12.5/36), 18 से ऊपर 17।
नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ
अश्विनी नक्षत्र को कन्या का मानकर 28.5/36। पुष्य को कन्या का मानें तो केवल वर्ण बदलकर 29.5/36। उस एक अंक के लिए अलग पृष्ठ नहीं — दोनों पाठ यहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अश्विनी — पुष्य मिलान में कितने अंक हैं?+
36 में से 28.5 (79%) — उत्तम मेल। यह पारंपरिक सीमा 18 से ऊपर है।
इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+
वर्ण कूट — 0/1। सबसे अधिक नाड़ी कूट — 8/8।
अश्विनी — पुष्य के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+
अश्विनी नक्षत्र से पुष्य 8वाँ; पुष्य नक्षत्र से अश्विनी 21वाँ। राशि के स्तर पर चौथी — 10वीं।
क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+
नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।