पुष्य — विशाखा नक्षत्र मिलान

पुष्य नक्षत्र और विशाखा नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 23 अंक मिलते हैं (64%) — स्वीकार्य मेल। आठ में सबसे मज़बूत नाड़ी कूट है। पुष्य नक्षत्र से विशाखा 9वाँ नक्षत्र है।

23

अंक / 36

स्वीकार्य मेल

प्रतिशत: 64%

विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36

क्या यह 23/36 आप पर भी लागू होता है?

यह पृष्ठ केवल पुष्य — विशाखा नक्षत्रों से गिना गया है। गण कूट यहाँ 0/6 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।

कार्ड नहीं · शुरू करने के लिए खाता नहीं·पूरी रिपोर्ट ₹699

दोनों नक्षत्रों का विवरण

पुष्यविशाखा
स्वामी ग्रहशनिगुरु
राशिकर्कतुला/वृश्चिक
गणदेवराक्षस
योनिमेषव्याघ्र
नाड़ीमध्यअन्त्य
तत्वजलवायु
देवताबृहस्पतिइंद्रग्नि
प्रतीकपुष्प/थनविजय तोरण
राशि विस्तार93°20' – 106°40'200°00' – 213°20'

आठ कूट — अंकों का विवरण

अंक / 36पुष्यविशाखा
1/1वर्ण कूट
पूरे अंक
जलवायु
1/2वश्य कूट
आंशिक
कर्कतुला/वृश्चिक
3/3तारा (दिन) कूट
पूरे अंक
9वाँ20वाँ
2/4योनि कूट
आंशिक
मेषव्याघ्र
1/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी)
कम
चंद्रमाशुक्र
0/6गण कूट
शून्य अंक
देवराक्षस
7/7भकूट (राशि) कूट
पूरे अंक
चौथी10वीं
8/8नाड़ी कूट
पूरे अंक
मध्यअन्त्य

अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान

अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।

रज्जुऊरु·उदरहै

ऊरु — उदर, अलग रज्जु।

वेधपूर्वाषाढ़ा·वेध नहींहै

पुष्य का वेध पूर्वाषाढ़ा है; विशाखा नहीं।

महेंद्र20वाँ·4·7·10·13·16·19·22·25नहीं

विशाखा नक्षत्र से पुष्य 20वाँ है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।

स्त्री-दीर्घ20वाँ·7 से अधिकहै

सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 20 है।

योनि लिंग (काणम्)पुरुष·स्त्रीहै

दोनों नक्षत्रों का लिंग अलग है — यह संयोग श्रेष्ठ माना जाता है।

इस मेल को क्या तय करता है

स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन

देव — राक्षस गण, 0/6। अलग स्वभाव; बदलने के बजाय स्वीकारना काम आता है।

मन और निर्णय

चंद्रमा — शुक्र शत्रु, 1/5। बड़े निर्णय पहले से तय कर लेना ज़रूरी।

शरीर, स्वास्थ्य और संतान

नाड़ी मध्य — अन्त्य, योनि मेष — व्याघ्र। इस स्तर पर अलग उपाय की ज़रूरत नहीं।

दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं

पुष्य: स्वामी शनि, देवता बृहस्पति, प्रतीक पुष्प/थन, देव गण, कर्क राशि। विशाखा: स्वामी गुरु, देवता इंद्रग्नि, प्रतीक विजय तोरण, राक्षस गण, तुला/वृश्चिक राशि।

दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा

पुष्य नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में विशाखा 10वाँ स्थान पर है; पुष्य के लिए सबसे अधिक अश्विनी (29.5/36), सबसे कम पूर्वाषाढ़ा (12.5/36), 18 से ऊपर 17 नक्षत्र। विशाखा के 26 में पुष्य 9वाँ स्थान पर; विशाखा के लिए सबसे अधिक धनिष्ठा (30.5/36), सबसे कम रेवती (5.5/36), 18 से ऊपर 17।

नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ

पुष्य नक्षत्र को कन्या का मानकर 23/36। विशाखा को कन्या का मानें तो केवल वर्ण बदलकर 22/36। उस एक अंक के लिए अलग पृष्ठ नहीं — दोनों पाठ यहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुष्य — विशाखा मिलान में कितने अंक हैं?+

36 में से 23 (64%) — स्वीकार्य मेल। यह पारंपरिक सीमा 18 से ऊपर है।

इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+

गण कूट — 0/6। सबसे अधिक नाड़ी कूट — 8/8।

पुष्य — विशाखा के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+

पुष्य नक्षत्र से विशाखा 9वाँ; विशाखा नक्षत्र से पुष्य 20वाँ। राशि के स्तर पर चौथी — 10वीं।

क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+

नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।

इन्हीं नक्षत्रों के अन्य जोड़े