
वैदिक ज्योतिष • नक्षत्र 16
विशाखा नक्षत्र — स्वामी, देवता और प्रभाव
Vishakha Nakshatra in Hindi
Tula/Vrishchik Rashi · Lord: Jupiter · Rakshasa Gana · Symbol: Triumphal Arch · Animal: Tiger
देवता
इंद्रग्नि
स्वामी ग्रह
गुरु
गुण
राक्षस • वायु/जल • स्त्री
पद
200° — 213.33° (तुला/वृश्चिक)
प्रतीक
विजय तोरण
पशु / वृक्ष
Tiger • Vikanthakari
विशाखा नक्षत्र — हिंदी में परिचय
विशाखा तुला और वृश्चिक राशि में फैली हुई है। इसका स्वामी ग्रह गुरु है और अधिष्ठाता देवता इंद्राग्नि हैं। यह दृढ़ संकल्प, एकाग्रचित्तता और लक्ष्यों को प्राप्त करने की शक्ति को दर्शाता है।
क्या आपका जन्म नक्षत्र विशाखा है?
नक्षत्र आपकी कुंडली का एक हिस्सा है। आपकी पूरी कुंडली बताती है कि आपका जन्म चंद्र सच में विशाखा में है या नहीं, लग्न और ग्रह उसके साथ कैसे बैठे हैं, अभी कौन-सी दशा चल रही है — और करियर, विवाह व आने वाले वर्षों के लिए इसका क्या अर्थ है।
विशाखा नक्षत्र के चार चरण
विशाखा नक्षत्र के चरण 1–3 तुला राशि में और चरण 4 वृश्चिक राशि में हैं।
| चरण | राशि | अंश | नवांश |
|---|---|---|---|
| 1 | तुला | 20°00′ – 23°20′ | मेष |
| 2 | तुला | 23°20′ – 26°40′ | वृषभ |
| 3 | तुला | 26°40′ – 30°00′ | मिथुन |
| 4 | वृश्चिक | 0°00′ – 3°20′ | कर्क |
चंद्रमा अगली बार विशाखा नक्षत्र में कब होगा?
| प्रारंभ | समाप्त |
|---|---|
| 9 नवंबर, सोमवार, 07:24 | 10 नवंबर, मंगलवार, 09:19 |
| 6 दिसंबर, रविवार, 13:38 | 7 दिसंबर, सोमवार, 15:48 |
| 2 जनवरी, शनिवार, 19:19 | 3 जनवरी, रविवार, 21:37 |
IST
विशाखा नक्षत्र: एकाग्रता और विजय
विशाखा नक्षत्र २७ नक्षत्रों में सोलहवें स्थान पर है। यह तुला राशि के २०°००' से वृश्चिक राशि के ३°२०' तक फैला हुआ है। बृहस्पति (गुरु) द्वारा शासित और इंद्र व अग्नि द्वारा निर्देशित, यह नक्षत्र दृढ़ संकल्प, महत्वाकांक्षा और जीवन के विभिन्न लक्ष्यों को प्राप्त करने की शक्ति का प्रतीक है।
'विशाखा' का अर्थ है 'शाखाओं वाला' या 'कांटा'। इसका प्रतीक 'सजा हुआ प्रवेश द्वार' (Leaf-covered Archway) है, जो विजय के जश्न और जीवन के एक चरण से दूसरे चरण में जाने को दर्शाता है। यह नक्षत्र उन लोगों से संबंधित है जो अपने लक्ष्यों के प्रति बहुत अधिक केंद्रित होते हैं।
सकारात्मक लक्षण
- अत्यधिक महत्वाकांक्षी और लक्ष्य के प्रति समर्पित
- धैर्यवान और लंबी अवधि के प्रयासों में सफल
- न्यायप्रिय और उच्च नैतिक मूल्यों वाले
चुनौतियां
- लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दूसरों के प्रति कठोर होना
- ईर्ष्या और प्रतिस्पर्धा की तीव्र भावना
- कभी-कभी बहुत अधिक अहंकारी होना
करियर और वित्त
विशाखा जातक राजनीति, कानून, कूटनीति और व्यापार के क्षेत्रों में बहुत सफल होते हैं। वे उत्कृष्ट वक्ता, प्रशासक और शोधकर्ता बनते हैं। बृहस्पति का प्रभाव उन्हें ज्ञान और आध्यात्मिकता के क्षेत्रों में भी सफलता दिलाता है।
अनुकूल पेशे:
राजनीति और लोक प्रशासन, न्यायिक सेवाएं, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, अनुसंधान और विज्ञान, और परामर्श।
विवाह और संबंध
संबंधों में विशाखा जातक अपने साथी के प्रति बहुत सुरक्षात्मक होते हैं। वे चाहते हैं कि उनके रिश्ते में स्पष्टता और सम्मान हो। हालांकि, उनकी महत्वाकांक्षा कभी-कभी पारिवारिक समय में बाधा बन सकती है। हस्त और स्वाति नक्षत्र के साथ उनकी अनुकूलता अच्छी रहती है।
उपाय और शांति विधि
गुरु (बृहस्पति) और इंद्र-अग्नि की कृपा पाने के लिए:
- प्रत्येक गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करें।
- पीले रंग के फल और चने की दाल का दान करें।
- अपनी महत्वाकांक्षाओं में दूसरों के प्रति सहानुभूति रखें।
- बीज मंत्र: "ॐ विशाखायै नमः" का १०८ बार जाप करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विशाखा नक्षत्र क्या है?
विशाखा तुला और वृश्चिक राशि में फैली हुई है। इसका स्वामी ग्रह गुरु है और अधिष्ठाता देवता इंद्राग्नि हैं। यह दृढ़ संकल्प, एकाग्रचित्तता और लक्ष्यों को प्राप्त करने की शक्ति को दर्शाता है।
विशाखा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
विशाखा नक्षत्र का स्वामी ग्रह गुरु है और देवता इंद्रग्नि हैं।
विशाखा नक्षत्र की राशि कौन सी है?
विशाखा नक्षत्र के चरण 1–3 तुला राशि में और चरण 4 वृश्चिक राशि में हैं।
विशाखा नक्षत्र का गण क्या है?
विशाखा नक्षत्र राक्षस गण का है।
विशाखा नक्षत्र का किस नक्षत्र से कितना मेल
हर जोड़े के लिए आठों कूट अलग से गिने गए हैं — अंक पर जाइए। सभी नक्षत्र जोड़े
अन्य नक्षत्र
नक्षत्र पाठ की शुरुआत है, अंत नहीं।
विशाखा चंद्र वालों के लिए — यह पृष्ठ बताता है कि इस नक्षत्र का स्वभाव और शास्त्रीय अर्थ क्या है। जो यह नहीं जान सकता, वह है कि आपका चंद्रमा किस भाव में है, और आपकी कुंडली में नक्षत्र-स्वामी की क्या स्थिति है।
जब नक्षत्र का स्वामी उच्च का और केंद्र में हो, वही नक्षत्र बिलकुल अलग व्यवहार करता है, बनिस्बत उसके जब वह स्वामी नीच का होकर आठवें भाव में बैठा हो। और यही नक्षत्र-स्वामी आपकी पहली दशा खोलता है, जो उसके बाद की पूरी समय-रेखा तय करता है।
रिपोर्ट आपके नक्षत्र को उस कुंडली के संदर्भ में पढ़ती है जिसमें वह बैठा है — उसके स्वामी की स्थिति, वह जिस भाव में पड़ता है, और वह जो दशा-क्रम चलाता है।
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