आर्द्रा — आश्लेषा नक्षत्र मिलान

आर्द्रा नक्षत्र और आश्लेषा नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 16.5 अंक मिलते हैं (46%) — उपाय के साथ विचार योग्य। आठ में सबसे मज़बूत नाड़ी कूट है। आर्द्रा नक्षत्र से आश्लेषा चौथा नक्षत्र है।

16.5

अंक / 36

उपाय के साथ विचार योग्य

प्रतिशत: 46%

विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36

क्या यह 16.5/36 आप पर भी लागू होता है?

यह पृष्ठ केवल आर्द्रा — आश्लेषा नक्षत्रों से गिना गया है। वर्ण कूट यहाँ 0/1 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।

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दोनों नक्षत्रों का विवरण

आर्द्राआश्लेषा
स्वामी ग्रहराहुबुध
राशिमिथुनकर्क
गणमनुष्यराक्षस
योनिश्वानमार्जार
नाड़ीआदिअन्त्य
तत्ववायुजल
देवतारुद्रसर्प (साँप)
प्रतीकअश्रुबिंदुसर्प
राशि विस्तार66°40' – 80°00'106°40' – 120°00'

आठ कूट — अंकों का विवरण

अंक / 36आर्द्राआश्लेषा
0/1वर्ण कूट
शून्य अंक
वायुजल
1/2वश्य कूट
आंशिक
मिथुनकर्क
1.5/3तारा (दिन) कूट
आंशिक
चौथा25वाँ
2/4योनि कूट
आंशिक
श्वानमार्जार
3/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी)
आंशिक
बुधचंद्रमा
1/6गण कूट
कम
मनुष्यराक्षस
0/7भकूट (राशि) कूट
भकूट दोष
दूसरी12वीं
8/8नाड़ी कूट
पूरे अंक
आदिअन्त्य

अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान

अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।

रज्जुकंठ·पादहै

कंठ — पाद, अलग रज्जु।

वेधश्रवण·वेध नहींहै

आर्द्रा का वेध श्रवण है; आश्लेषा नहीं।

महेंद्र25वाँ·4·7·10·13·16·19·22·25है

आश्लेषा नक्षत्र से आर्द्रा 25वाँ है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।

स्त्री-दीर्घ25वाँ·7 से अधिकहै

सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 25 है।

योनि लिंग (काणम्)स्त्री·स्त्रीनहीं

दोनों नक्षत्रों का लिंग एक ही है।

इस मेल को क्या तय करता है

स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन

मनुष्य — राक्षस गण, 1/6। अलग स्वभाव; बदलने के बजाय स्वीकारना काम आता है।

मन और निर्णय

बुध — चंद्रमा तटस्थ, 3/5। सामान्य बातचीत में निर्णय बन जाते हैं।

शरीर, स्वास्थ्य और संतान

नाड़ी आदि — अन्त्य, योनि श्वान — मार्जार। इस स्तर पर अलग उपाय की ज़रूरत नहीं।

दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं

आर्द्रा: स्वामी राहु, देवता रुद्र, प्रतीक अश्रुबिंदु, मनुष्य गण, मिथुन राशि। आश्लेषा: स्वामी बुध, देवता सर्प (साँप), प्रतीक सर्प, राक्षस गण, कर्क राशि।

दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा

आर्द्रा नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में आश्लेषा 22वाँ स्थान पर है; आर्द्रा के लिए सबसे अधिक पूर्व फाल्गुनी (28.5/36), सबसे कम ज्येष्ठा (3.5/36), 18 से ऊपर 20 नक्षत्र। आश्लेषा के 26 में आर्द्रा 18वाँ स्थान पर; आश्लेषा के लिए सबसे अधिक चित्रा (29.5/36), सबसे कम रेवती (9/36), 18 से ऊपर 17।

नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ

आर्द्रा नक्षत्र को कन्या का मानकर 16.5/36। आश्लेषा को कन्या का मानें तो केवल वर्ण बदलकर 17.5/36। उस एक अंक के लिए अलग पृष्ठ नहीं — दोनों पाठ यहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आर्द्रा — आश्लेषा मिलान में कितने अंक हैं?+

36 में से 16.5 (46%) — उपाय के साथ विचार योग्य। यह पारंपरिक सीमा 18 तक नहीं पहुँचता।

इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+

वर्ण कूट — 0/1। सबसे अधिक नाड़ी कूट — 8/8।

आर्द्रा — आश्लेषा के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+

आर्द्रा नक्षत्र से आश्लेषा चौथा; आश्लेषा नक्षत्र से आर्द्रा 25वाँ। राशि के स्तर पर दूसरी — 12वीं।

क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+

नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।

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