श्रवण — उत्तराषाढ़ा नक्षत्र मिलान

श्रवण नक्षत्र और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र को अष्टकूट पद्धति में 36 में से 14 अंक मिलते हैं (39%) — उपाय के साथ विचार योग्य। आठ में सबसे मज़बूत तारा (दिन) कूट है। श्रवण नक्षत्र से उत्तराषाढ़ा 27वाँ नक्षत्र है।

14

अंक / 36

उपाय के साथ विचार योग्य

प्रतिशत: 39%

विवाह के लिए पारंपरिक सीमा 18/36

क्या यह 14/36 आप पर भी लागू होता है?

यह पृष्ठ केवल श्रवण — उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों से गिना गया है। वर्ण कूट यहाँ 0/1 है — वह आपकी अपनी कुंडली में कैसे बैठता है, यह आपके जन्म विवरण ही बताएँगे। पहला अध्याय मुफ़्त।

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दोनों नक्षत्रों का विवरण

श्रवणउत्तराषाढ़ा
स्वामी ग्रहचंद्रमासूर्य
राशिमकरधनु/मकर
गणदेवमनुष्य
योनिवानरनकुल
नाड़ीअन्त्यअन्त्य
तत्वपृथ्वीअग्नि
देवताविष्णुविश्वेदेवा
प्रतीकतीन पदचिह्न/कानगजदंत
राशि विस्तार280°00' – 293°20'266°40' – 280°00'

आठ कूट — अंकों का विवरण

अंक / 36श्रवणउत्तराषाढ़ा
0/1वर्ण कूट
शून्य अंक
पृथ्वीअग्नि
1/2वश्य कूट
आंशिक
मकरधनु/मकर
3/3तारा (दिन) कूट
पूरे अंक
27वाँदूसरा
2/4योनि कूट
आंशिक
वानरनकुल
3/5ग्रह मैत्री (राशि स्वामी)
आंशिक
शनिगुरु
5/6गण कूट
आंशिक
देवमनुष्य
0/7भकूट (राशि) कूट
भकूट दोष
12वींदूसरी
0/8नाड़ी कूट
नाड़ी दोष
अन्त्यअन्त्य

अष्टकूट से बाहर के पाँच मिलान

अष्टकूट के आठ कूट ऊपर हैं। शास्त्र में इनके अलावा भी कुछ जाँच होती हैं, जो केवल दोनों नक्षत्रों की गिनती से निकलती हैं — वे पाँच यहाँ हैं।

रज्जुकंठ·उदरहै

कंठ — उदर, अलग रज्जु।

वेधआर्द्रा·वेध नहींहै

श्रवण का वेध आर्द्रा है; उत्तराषाढ़ा नहीं।

महेंद्रदूसरा·4·7·10·13·16·19·22·25नहीं

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र से श्रवण दूसरा है। 4, 7, 10, 13, 16, 19, 22, 25 में से कोई हो तो महेंद्र माना जाता है।

स्त्री-दीर्घदूसरा·7 से अधिकनहीं

सात से अधिक का अंतर चाहिए; यहाँ 2 है।

योनि लिंग (काणम्)पुरुष·स्त्रीहै

दोनों नक्षत्रों का लिंग अलग है — यह संयोग श्रेष्ठ माना जाता है।

इस मेल को क्या तय करता है

स्वभाव और रोज़मर्रा का जीवन

मकर — धनु/मकर, अंतर 12-2: भकूट दोष। पारिवारिक निर्णय बात करके तय करने होंगे।

मन और निर्णय

शनि — गुरु तटस्थ, 3/5। सामान्य बातचीत में निर्णय बन जाते हैं।

शरीर, स्वास्थ्य और संतान

दोनों अन्त्य नाड़ी: नाड़ी दोष, आठ में सबसे भारी कूट। पूरी कुंडली मिलान और उपाय की सलाह चाहिए।

दोनों नक्षत्र किसका प्रतिनिधित्व करते हैं

श्रवण: स्वामी चंद्रमा, देवता विष्णु, प्रतीक तीन पदचिह्न/कान, देव गण, मकर राशि। उत्तराषाढ़ा: स्वामी सूर्य, देवता विश्वेदेवा, प्रतीक गजदंत, मनुष्य गण, धनु/मकर राशि।

दोनों नक्षत्रों की अपनी सूची में यह जोड़ा

श्रवण नक्षत्र के 26 संभावित साथियों में उत्तराषाढ़ा 23वाँ स्थान पर है; श्रवण के लिए सबसे अधिक धनिष्ठा (28/36), सबसे कम मघा (3.5/36), 18 से ऊपर 18 नक्षत्र। उत्तराषाढ़ा के 26 में श्रवण 22वाँ स्थान पर; उत्तराषाढ़ा के लिए सबसे अधिक पूर्वाषाढ़ा (34/36), सबसे कम आश्लेषा (9.5/36), 18 से ऊपर 17।

नक्षत्रों का क्रम और यह पृष्ठ

श्रवण नक्षत्र को कन्या का मानकर 14/36। उत्तराषाढ़ा को कन्या का मानें तो केवल वर्ण बदलकर 15/36। उस एक अंक के लिए अलग पृष्ठ नहीं — दोनों पाठ यहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रवण — उत्तराषाढ़ा मिलान में कितने अंक हैं?+

36 में से 14 (39%) — उपाय के साथ विचार योग्य। यह पारंपरिक सीमा 18 तक नहीं पहुँचता।

इस जोड़े में कौन-सा कूट कम पड़ रहा है?+

वर्ण कूट — 0/1। सबसे अधिक तारा (दिन) कूट — 3/3।

श्रवण — उत्तराषाढ़ा के बीच कितने नक्षत्र का अंतर है?+

श्रवण नक्षत्र से उत्तराषाढ़ा 27वाँ; उत्तराषाढ़ा नक्षत्र से श्रवण दूसरा। राशि के स्तर पर 12वीं — दूसरी।

क्या इन्हीं अंकों के आधार पर निर्णय लिया जा सकता है?+

नहीं। रज्जु, वेध, मांगलिक दोष और दशा — ये दोनों की पूरी कुंडली में ही दिखते हैं। इसे पहली जाँच मानिए।

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