
वैदिक ज्योतिष • नक्षत्र 26
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र — स्वामी, देवता और प्रभाव
Uttara Bhadrapada Nakshatra in Hindi
Meen Rashi · Lord: Saturn · Manushya Gana · Symbol: Back of Funeral Cot/Twins · Animal: Cow
देवता
अहिर्बुध्न्य
स्वामी ग्रह
शनि
गुण
मनुष्य • जल • स्त्री
पद
333.33° — 346.67° (मीन)
प्रतीक
अर्थी का पिछला हिस्सा / जुड़वां
पशु / वृक्ष
Cow • Neem
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र — हिंदी में परिचय
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र मीन राशि में स्थित है। इसका स्वामी शनि ग्रह है और इस पर अहिरबुध्न्य (गहरे जल का सर्प) का आधिपत्य है। यह गहराई, ज्ञान, सहनशक्ति और गुप्त शक्तियों को नियंत्रित करने की क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है।
क्या आपका जन्म नक्षत्र उत्तर भाद्रपद है?
नक्षत्र आपकी कुंडली का एक हिस्सा है। आपकी पूरी कुंडली बताती है कि आपका जन्म चंद्र सच में उत्तर भाद्रपद में है या नहीं, लग्न और ग्रह उसके साथ कैसे बैठे हैं, अभी कौन-सी दशा चल रही है — और करियर, विवाह व आने वाले वर्षों के लिए इसका क्या अर्थ है।
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र के चार चरण
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र के चारों चरण मीन राशि में हैं।
| चरण | राशि | अंश | नवांश |
|---|---|---|---|
| 1 | मीन | 3°20′ – 6°40′ | सिंह |
| 2 | मीन | 6°40′ – 10°00′ | कन्या |
| 3 | मीन | 10°00′ – 13°20′ | तुला |
| 4 | मीन | 13°20′ – 16°40′ | वृश्चिक |
चंद्रमा अगली बार उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में कब होगा?
| प्रारंभ | समाप्त |
|---|---|
| 23 अक्टूबर, शुक्रवार, 21:03 | 24 अक्टूबर, शनिवार, 20:32 |
| 20 नवंबर, शुक्रवार, 06:57 | 21 नवंबर, शनिवार, 06:51 |
| 17 दिसंबर, गुरुवार, 15:31 | 18 दिसंबर, शुक्रवार, 16:10 |
IST
उत्तरभाद्रपद नक्षत्र: गहराई और ज्ञान का सागर
उत्तरभाद्रपद नक्षत्र २७ नक्षत्रों में छब्बीसवें स्थान पर है और यह पूरी तरह से मीन राशि में ३°२०' से १६°४०' तक स्थित है। शनि द्वारा शासित और गहरे समुद्र के नाग 'अहिर्बुधन्य' (Ahirbudhnya) द्वारा निर्देशित, यह नक्षत्र छिपे हुए ज्ञान, धैर्य और आध्यात्मिक स्थिरता का प्रतीक है।
'उत्तरभाद्रपद' का अर्थ है 'सुंदर चरणों वाला दूसरा'। इसका प्रतीक 'जुड़वां बच्चे' (Twins) या 'सांप' (Serpent) है, जो बुद्धिमत्ता की गहराई, कुंडलिनी शक्ति और जीवन के गहरे रहस्यों को समझने की क्षमता को दर्शाता है। यह नक्षत्र शांति, समृद्धि और लंबी अवधि की सफलता के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
सकारात्मक लक्षण
- अत्यधिक शांत, उदार और दयालु स्वभाव
- गहरा धैर्य और लंबी अवधि की योजनाओं में सफल
- आध्यात्मिक गहराई और परोपकारी दृष्टिकोण
चुनौतियां
- अत्यधिक आलस्य और कार्यों को टालने की प्रवृत्ति
- कभी-कभी बहुत अधिक रहस्यमयी और एकाकी होना
- रिश्तों में बहुत अधिक गंभीरता के कारण दूरी
करियर और वित्त
उत्तरभाद्रपद जातक चिकित्सा, शोध, दर्शन और सामाजिक संगठनों के क्षेत्रों में बहुत सफल होते हैं। वे उत्कृष्ट दार्शनिक, डॉक्टर, सलाहकार (Counselor) और आध्यात्मिक गुरु बनते हैं। शनि का प्रभाव उन्हें धैर्यपूर्ण निवेश और लंबी अवधि के व्यापार में सफलता दिलाता है।
अनुकूल पेशे:
चिकित्सा और मनोविज्ञान, दर्शन और अध्यापन, आध्यात्मिक नेतृत्व, शोध और अनुसंधान, और सामाजिक कल्याण संगठन।
विवाह और संबंध
संबंधों में उत्तरभाद्रपद जातक बहुत ही समर्पित और भावनात्मक स्थिरता देने वाले होते हैं। वे अपने परिवार की शांति और सुरक्षा के लिए कुछ भी कर सकते हैं। वे एक सुखी और शांत पारिवारिक जीवन बिताते हैं। रेवती और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के साथ उनकी अनुकूलता अच्छी रहती है।
उपाय और शांति विधि
शनि की स्थिरता और अहिर्बुधन्य का आशीर्वाद पाने के लिए:
- भगवान शिव या हनुमान जी की नियमित पूजा करें।
- शनिवार को काले तिलों या लोहे की वस्तुओं का दान करें।
- बड़ों और बुजुर्गों की सेवा करें और उनका अपमान न करें।
- बीज मंत्र: "ॐ उत्तरभाद्रपदाय नमः" का नियमित जाप करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र क्या है?
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र मीन राशि में स्थित है। इसका स्वामी शनि ग्रह है और इस पर अहिरबुध्न्य (गहरे जल का सर्प) का आधिपत्य है। यह गहराई, ज्ञान, सहनशक्ति और गुप्त शक्तियों को नियंत्रित करने की क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है।
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है और देवता अहिर्बुध्न्य हैं।
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र की राशि कौन सी है?
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र के चारों चरण मीन राशि में हैं।
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र का गण क्या है?
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र मनुष्य गण का है।
उत्तर भाद्रपद नक्षत्र का किस नक्षत्र से कितना मेल
हर जोड़े के लिए आठों कूट अलग से गिने गए हैं — अंक पर जाइए। सभी नक्षत्र जोड़े
अन्य नक्षत्र
नक्षत्र पाठ की शुरुआत है, अंत नहीं।
उत्तर भाद्रपद चंद्र वालों के लिए — यह पृष्ठ बताता है कि इस नक्षत्र का स्वभाव और शास्त्रीय अर्थ क्या है। जो यह नहीं जान सकता, वह है कि आपका चंद्रमा किस भाव में है, और आपकी कुंडली में नक्षत्र-स्वामी की क्या स्थिति है।
जब नक्षत्र का स्वामी उच्च का और केंद्र में हो, वही नक्षत्र बिलकुल अलग व्यवहार करता है, बनिस्बत उसके जब वह स्वामी नीच का होकर आठवें भाव में बैठा हो। और यही नक्षत्र-स्वामी आपकी पहली दशा खोलता है, जो उसके बाद की पूरी समय-रेखा तय करता है।
रिपोर्ट आपके नक्षत्र को उस कुंडली के संदर्भ में पढ़ती है जिसमें वह बैठा है — उसके स्वामी की स्थिति, वह जिस भाव में पड़ता है, और वह जो दशा-क्रम चलाता है।
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